अयोध्या। सरयू तट के ऐतिहासिक पाप मोचन घाट पर एक बार फिर अपनी पहचान दर्ज कराता हुए माइल स्टोन स्थापित कर दिया गया है। घाट के सुंदरीकरण कार्य के दौरान अंग्रेजी काल का यह माइल स्टोन उखाड़ दिया गया था, जिस पर संत समाज ने आपत्ति जताई थी और इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की गई थी। अयोध्या की शास्त्रीय परिधि की महत्ता बताने व उसके सरंक्षण के लिए 1902 में 148 माइल स्टोन लगाए गए थे, उनकी सुरक्षा के लिए एक समिति भी बनी थी।
1902 में तत्कालीन जिलाधिकारी आरसी होबर्ट ने एडवर्ड अयोध्या तीर्थ विवेचनी सभा का गठन किया। इसके बाद अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा की परिधि के अंदर स्थित पौराणिक स्थलों, कुंड,सरोवरों, मठ-मंदिरों में माइल स्टोन लगाए गए, जिनकी कुल संख्या 148 थी। इन पत्थरों को नुकसान पहुंचाने पर जुर्माना व सजा के भी प्राविधान थे। इस समय सरयू के घाटों के सुंदरीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। कार्यदायी संस्था की ओर से सरयू के पापमोचन घाट पर लगे 77 नंबर के एडवर्ड के पत्थर को उखाड़ दिया गया।
इसकी सूचना लक्ष्मण किला के महंत मैथिलीरमण शरण व एडवर्ड तीर्थ विवेचनी सभा के महासचिव महंत रामदास को मिली तो उन्होंने कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की। महंत रामदास ने बताया कि शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया और तीन दिनों के भीतर पत्थर को खोज लिया गया। बुधवार को आरएम अयोध्या, सीओ अयोध्या की मौजूदगी में पाप मोचन घाट पर पत्थर को लाकर रख दिया गया है। इसे अब पुन: स्थापित किया जाएगा। सरयू तट के पापमोचन घाट की पौराणिक महत्ता है। इस घाट पर स्नान करने से लोगों के पापों का क्षय होता है।