अयोध्या। पांच से आठ नवंबर तक होने वाले दीपोत्सव की तैयारियों ने गति पकड़ ली है। घाटों पर करीब 10 लाख दीये पहुंच चुके हैं। शुक्रवार को दूसरे दिन भी घाटों पर मार्किंग का काम चला। अब तक सरयू नदी के 10 घाटों पर मार्किंग पूरी हो चुकी है। इस बार 35 हजार से अधिक स्वयंसेवक 30 लाख से ज्यादा दीये जलाएंगे। विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
दीपोत्सव की सफलता और मंगलकामना के लिए अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने शुक्रवार को राम की पैड़ी पर मुख्य यजमान के रूप में मां सरयू और प्रभु श्रीराम का विधिवत भूमि पूजन किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सरयू मंदिर के पुजारी पं. नेत्रजा मिश्र ने पूजन संपन्न कराया। कुलपति ने कहा कि दीपोत्सव सनातन संस्कृति की आभा और जन-जन की आस्था का महापर्व है। प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद और स्वयंसेवकों के समर्पण से अयोध्या एक बार फिर विश्व पटल पर नया कीर्तिमान स्थापित करेगी। सात नवंबर को मुख्य आयोजन होना है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनय कुमार सिंह, दीपोत्सव नोडल अधिकारी प्रो. संत शरण मिश्र, प्रो. नीलम पाठक, प्राचार्य प्रो. दानपति तिवारी, प्रो. अनूप कुमार, प्रो. सीके मिश्र, प्रो. शैलेंद्र कुमार, डॉ. विनोद कुमार चौधरी, डॉ. दिवाकर त्रिपाठी और डॉ. विजेंदु चतुर्वेदी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी और बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
ग्रिड में दीये सजाने का दिया जा रहा प्रशिक्षण
दीपोत्सव में विश्वविद्यालय के आवासीय परिसर, संबद्ध महाविद्यालयों, इंटर कॉलेजों और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के 35 हजार से अधिक स्वयंसेवक भाग लेंगे। विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों और विभागों में उनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया चल रही है। स्वयंसेवकों को घाटों पर निर्धारित ग्रिड में दीये सजाने, तेल और बाती का प्रबंधन करने, समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के निर्धारित मानकों का पालन करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।