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Ayodhya News: जैन मंदिर में होंगे भगवान ऋषभदेव के 101 पुत्रों के दर्शन

Sun, 02 Mar 2025 09:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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अयोध्या। रामनगरी में जैन धर्म की भी जड़ें गहरी हैं। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव समेत पांच तीर्थंकरों की जन्मस्थली अयोध्या ही है। भगवान रामलला के भव्य मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में स्थित जैन धरोहर भी नए सिरे से समृद्ध हो रही है। जैन मंदिर रायगंज दुनिया का पहला जैन मंदिर होने जा रहा है जहां, भगवान ऋषभदेव के 101 पुत्रों के भी दर्शन होंगे। इसके लिए यहां तीस चौबीसी व तीन लोक मंदिर का भी निर्माण हो रहा है। इन मंदिरों में भगवान की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव शुरू हो चुका है।
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जैन धर्म के संस्थापक प्रथम तीर्थंकर ऋषभ देव का ऋग्वेद, अर्थववेद, मनु स्मृति एवं भागवत आदि अनेक ग्रंथों में वर्णन मिलता है। शिव पुराण में ऋषभ देव को शिव के 28 योग अवतारों में गिना गया है। राजा नाभि व माता मधु देवी के घर उनका जन्म चैत्र कृष्ण नवमी को अयोध्या में हुआ। राजगद्दी पर विराजित होने के बाद ऋषभ देव ने अपनी प्रजा को असि, मशी, शिल्प, वाणिज्य, विद्या, कृषि आदि जीवन यापन करना सिखाया। इसलिए इन्हें प्रजापति भी कहा जाता है। इनके पुत्र भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम भारतवर्ष पड़ा।

जैन मंदिर रायगंज के पीठाधीश्वर रवींद्र कीर्ति स्वामी बताते हैं कि सामूहिक जीवन का महत्व समझते हुए ऋषभ देव ने ग्राम व्यवस्था प्रारंभ की। अपराध को रोकने के लिए उन्होंने दंड व्यवस्था आरंभ की। उन्होंने अपना जीवन सामाजिक और राजनैतिक मूल्यों पर व्यतीत किया। भगवान ऋषभ देव की आयु 84 लाख पूर्व वर्ष की थी। उन्होंने 83 लाख वर्ष तक राज्य किया। उसके बाद साधु जीवन व्यतीत करना शुरू कर दिया। एक हजार वर्ष तक वे साधनारत रहे। एक वर्ष तप करने के बाद पुरी मितालपुर में उनको वृक्ष के नीचे केवल ज्ञान प्राप्त हुआ और वह सर्वज्ञा बने। अपने जीवन का अवसान निकट जान कर वो 10 हजार साधुओं के साथ कैलाश पर्वत के पास पहुंचे। छह दिनों के तप के बाद उन्होंने निर्वाण पद प्राप्त किया।
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रवींद्र कीर्ति स्वामी ने बताया कि जैनधर्म का चिन्ह माना जाने वाला तीन लोक मंदिर बनकर तैयार है। लगभग 50 फीट ऊंची श्वेत मकराना मार्बल की आभा से यह रचना पूरे अयोध्या की एक अद्वितीय रचना बनकर जैनधर्म का मर्म समझाने के लिए तैयार है। इस रचना में जहां ब्रह्म स्थान अर्थात् मोक्ष की सत्य परिकल्पना जानने को मिलेगी, वहीं स्वर्ग के स्थान, मनुष्य और तिर्यंच लोक का स्थान और उसके साथ ही नरक में रहने वाले पापी जीवों के स्थान भी क्रमशः स्वर्गलोक, मध्यलोक एवं नरक लोक के रूप में देखने को मिलेगा। तीन लोक रचना में सिद्ध भगवंतों की 727 जिनप्रतिमाएं विराजमान होंगी।
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