कुमारगंज (अयोध्या)। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के हाईटेक हाल में ''कृषि में लेजर प्रौद्योगिकियों का अनुप्रयोग'' विषयक व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि शिक्षा, नई दिल्ली के उप महानिदेशक डॉ. आरसी अग्रवाल, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की वैज्ञानिक डॉ. ललिता अग्रवाल और कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने किया।
डीआरडीओ की वैज्ञानिक डॉ. ललिता अग्रवाल ने कृषि में लेजर के प्रयोग पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लेजर प्रकाश की एक बहुत ही संकीर्ण किरण उत्पन्न करता है जो कई प्रौद्योगिकियों और उपकरणों में उपयोगी है। लेजर का उपयोग कृषि में तकनीकी सुविधा के लिए जरूरी है।
उन्होंने बताया कि बीज के अंकुरण, पौधों की वृद्धि और तनाव सहनशीलता को बढ़ाने के लिए लेजर बायोस्टिम्यूलेशन एक आशाजनक और टिकाऊ विकल्प के रूप में उभरा है। लेजर लैंड लेबलर का प्रयोग खेतों को समतल करने के लिए किया जाता है। उन्होंने लेजर प्रयोग के विभिन्न आयामों पर भी विस्तार से जानकारी दी।
इस दौरान आईसीएआर के डीडीजी कृषि शिक्षा ने नई शिक्षा नीति पर विश्वविद्यालय के संकायों और छात्र-छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि समय के अनुसार परिवर्तन को ध्यान में रखकर खेती में नई तकनीकों को अपनाने की जरूरत है। कृषि के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा जरूरी है, नहीं तो 2030 तक मात्र 59 प्रतिशत लोगों को ही भोजन मिल पाएगा।
उन्होंने सलाह दी कि सभी छात्र छात्राएं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कोर्स व दीक्षा पोर्टल का उपयोग अवश्य करें। साथ ही यह भी बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से कृषि शिक्षा में बड़ा बदलाव होगा। इससे छात्रों के सर्वांगीण विकास में मदद मिलेगी।
नई शिक्षा नीति से श्रीलंका, बांग्लादेश व जिंबाब्वे आदि के विद्यार्थियों को भारत में पढ़ाई करने का मौका मिला है और अपने देश के विद्यार्थी भी विदेशों में गए हैं। व्याख्यान कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विवि के कुलपति ने विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण उपलब्धियों की जानकारी दी।
इस दौरान नाहेप के उद्देश्यों और कृषि में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध के योगदान को प्रजेंटेशन के माध्यम से बताया गया। इस बीच पर छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किअ। इस मौके पर डॉ. डी नियोगी व कुलसचिव डॉ. पीएस प्रामाणिक मौजूद रहे।