अयोध्या। अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में भगवान श्रीराम की यात्रा को नदियों, आश्रमों और महापुरुषों से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से प्रस्तुत करने की योजना है। रामायण में वर्णित वनयात्रा के प्रमुख पड़ावों में गंगा, यमुना और गोदावरी जैसी नदियों के साथ चित्रकूट और पंचवटी जैसे स्थलों का विशेष महत्व है। इन प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, ऋषि-मुनियों से उनके संवाद और सामाजिक समरसता के संदेश को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव सिंह के अनुसार, रामायण में वनगमन के दौरान गंगा तट पर भगवान श्रीराम और निषादराज के मिलन तथा नदी पार करने के प्रसंग का विशेष महत्व है। इसके बाद भगवान श्रीराम प्रयाग में महर्षि भारद्वाज के आश्रम पहुंचते हैं और वहां से चित्रकूट की ओर प्रस्थान करते हैं। आगे की यात्रा में पंचवटी और गोदावरी नदी से जुड़े प्रसंग आते हैं। इन सभी पड़ावों को स्थानों के क्रम और उनसे संबंधित कथाओं के साथ प्रस्तुत करने की योजना है, ताकि दर्शक रामायण में वर्णित वनयात्रा को क्रमबद्ध तरीके से समझ सकें।
महापुरुषों से मुलाकात के प्रसंग भी होंगे महत्वपूर्ण
रामायण में महर्षि भारद्वाज, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि अत्रि, माता अनसूया और महर्षि अगस्त्य से जुड़ी मुलाकातों के प्रसंग भगवान श्रीराम की यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। वहीं, निषादराज से मित्रता और माता शबरी के प्रति भगवान श्रीराम के व्यवहार को सामाजिक समरसता, आत्मीयता और सम्मान के संदेश से जोड़कर प्रस्तुत किया जाएगा।
गैलरी में डिजिटल मानचित्र के माध्यम से नदियों और प्रमुख स्थलों को क्रमवार दिखाने की योजना है। इसके अलावा बड़ी स्क्रीन पर नदी तटों, आश्रमों और वनयात्रा से जुड़े दृश्यों का प्रदर्शन किया जाएगा। इससे दर्शकों को रामायण के प्रमुख प्रसंगों और उनके सांस्कृतिक महत्व को समझने में मदद मिलेगी।