अयोध्या। त्याग और संयम से ही व्यक्ति महान बनता है और उसके गुणों की पूजा होती है। यह पूजन मेरा नहीं, बल्कि संयम और त्याग का है। गणिनीप्रमुख आर्यिका ज्ञानमती माता ने अपने 93वें जन्मोत्सव और 75वें संयम दिवस पर श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया। शरद पूर्णिमा पर रायगंज स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति में आयोजित महोत्सव में भक्ति और साधना का संगम देखने को मिला। इस दौरान तीस चौबीसी जिनालय के शिखर पर कलशारोहण और ध्वजारोहण किया गया। देश के करीब 22 प्रांतों से पहुंचे हजारों श्रद्धालु आयोजन के साक्षी बने।
महोत्सव में भगवान ऋषभदेव का पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद तीस चौबीसी जिनालय के मध्य शिखर पर कुलाधिपति सुरेशचंद जैन, दायीं ओर के शिखर पर जिनराज जैन और बायीं ओर के शिखर पर गजराज जैन की ओर से कलशारोहण कराया गया। श्रद्धालु कलश को रथ पर विराजमान कर परिसर में भ्रमण करते हुए मंदिर पहुंचे। जयकारों और भक्तिभाव के बीच शिखरों पर कलश और ध्वजा स्थापित की गई।
आर्यिका चंदनामती माताजी के सान्निध्य में 108 जोड़ों ने सरस्वती और महालक्ष्मी की अर्चना की। गणिनी ज्ञानमती माता की ज्ञानाराधना 75 मंत्रों और 93 अर्घ्यों के साथ संपन्न हुई। संयम दिवस पर माताजी को पिच्छी, कमंडलु और शास्त्र भेंट किए गए। इस अवसर पर 93 विद्युत दीप भी प्रज्ज्वलित किए गए।
1008 दीपों से हुई मंगल आरती
समारोह में तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद की छात्राओं और टिकैतनगर बालिका मंडल ने भक्ति नृत्य प्रस्तुत किए। शाम को 1008 दीपों से मंगल आरती की गई। श्रद्धालुओं के लिए 93 प्रकार के व्यंजन भी तैयार किए गए। मुख्य सभा की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सुरेशचंद जैन ने की। तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जीवन प्रकाश जैन और अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी के मंत्री विजय कुमार जैन ने किया।
आरती जैन को मिला गणिनी ज्ञानमती पुरस्कार
समारोह में धर्म, समाजसेवा और संयम के क्षेत्र में योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया। संस्थान का सर्वोच्च सम्मान गणिनी ज्ञानमती पुरस्कार प्रयागराज की आरती जैन शीशे वाले को प्रदान किया गया। उन्हें 2.51 लाख रुपये, अंगवस्त्र, शॉल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उनके परिवार का अयोध्या सहित विभिन्न जैन तीर्थों के विकास और धार्मिक कार्यों में योगदान रहा है। हरियाणा के गजेंद्र जैन को जैन पंचांग के निर्माण और प्रकाशन की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए जम्बूद्वीप पुरस्कार दिया गया। सामाजिक सेवा के लिए सांगली के डॉ. चंद्रकांत नेमिनाथ चौगुले को लाला छोटेलाल जैन स्मृति पुरस्कार और गोरखपुर की अनोपबाई पुखराज पांड्या को आर्यिका रत्नमती पुरस्कार प्रदान किया गया। दिल्ली की कुसुमलता जैन और अनीता जैन, टिकैतनगर की सुषमा जैन, संभाजीनगर की सुनीता कासलीवाल और लखनऊ की अर्चना जैन को आर्यिका रत्नमती नारी सम्मान से नवाजा गया।