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Ayodhya News: भक्ति भाव के साथ हुआ इंद्रध्वज मंडल विधान का समापन

Fri, 06 Mar 2026 08:34 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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07- इंद्रध्वज मंडल विधान के समापन पर निकाली गई शोभायात्रा- संगठन
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अयोध्या। रायगंज स्थित जैन मंदिर में आयोजित इंद्रध्वज मंडल विधान अनुष्ठान का शुक्रवार को अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव के साथ भव्य समापन हुआ। कई दिनों से चल रहे इस धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिन भगवान ऋषभदेव का विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक कर विश्व शांति की कामना की गई। हवन के साथ अनुष्ठान की पूर्णाहुति हुई।
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इंद्रध्वज मंडल विधान का शुभारंभ 24 फरवरी से हुआ था। तब से प्रतिदिन भगवान जिनेंद्र का विधि-विधान से अभिषेक, पूजन, अर्घ्य समर्पण और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम निरंतर चलता रहा। अनुष्ठान के दौरान जैन समाज के श्रद्धालु इंद्र और इंद्राणी की पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर पूजन-अर्चन करते रहे। समापन अवसर पर जैन मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी व आर्यिका चंदनामती के नेतृत्व में भव्य रथयात्रा भी निकाली गई। रथयात्रा जैन मंदिर रायगंज से प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होती हुई पुनः मंदिर परिसर पहुंची। यात्रा के दौरान श्रद्धालु भक्ति गीतों का गान करते हुए भगवान जिनेंद्र की जयकार करते चले। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर रथयात्रा का स्वागत किया।



रवींद्रकीर्ति स्वामी ने बताया कि इंद्रध्वज मंडल विधान का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से पूरे विश्व में शांति, सद्भाव और अहिंसा का संदेश प्रसारित करना भी है। जैन धर्म की मूल भावना भी यही है कि सभी जीवों के प्रति करुणा और अहिंसा का भाव रखा जाए। कार्यक्रम में प्रतिष्ठाचार्य पंडित विजय जैन, सुरेंद्र जैन, मनोज जैन सहित विभिन्न प्रांतों से आए श्रद्धालु शामिल रहे।
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458 जिन मंदिरों की प्रतीकात्मक आकृतियां बनाकर हुआ पूजन
डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने बताया कि इस विशेष विधान के दौरान विश्व शांति, मानव कल्याण और सुख-समृद्धि की मंगल कामनाओं के साथ 458 जिन मंदिरों की प्रतीकात्मक आकृतियां तैयार की गईं। इन सभी मंदिरों के शिखरों पर श्रद्धालुओं ने विधिवत ध्वजारोहण किया। जैन परंपरा के अनुसार ध्वजारोहण को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और इसे धर्म, शांति व समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। जैन मान्यता के अनुसार स्वर्ग के देवताओं के राजा इंद्र भगवान जितेंद्र की पूजा करते हैं। उसी परंपरा का प्रतीकात्मक रूप इंद्रध्वज मंडल विधान में देखने को मिलता है।
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