अयोध्या। मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में रविवार को कहीं डॉक्टर गायब मिले तो कहीं अस्पतालों में ताला लगा रहा। कहीं चिकित्सक नहीं पहुंचे तो कहीं लैब टेक्नीशियन के अभाव में जांच नहीं हुई। कई केंद्रों में फार्मासिस्ट ने मरीजों को दवाएं दीं तो कुछ जगह दोपहर बाद अस्पतालों में सन्नाटा मिला। जिले के 968 संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल ने व्यवस्था को प्रभावित कर दिया। कई केंद्रों पर व्यवस्था ही नदारद मिली।
वार्डबॉय के हवाले मिला अस्पताल
मिल्कीपुर। क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खड़भड़िया में दोपहर 1:50 बजे केवल वार्डबॉय दलबहादुर सिंह मौजूद मिले। उन्होंने बताया कि डॉक्टर और फार्मासिस्ट राशिद खान कुछ देर पहले चले गए। यहां मेले में 23 मरीजों का पंजीकरण हुआ था।
चौरे बाजार में दोपहर बाद बंद मिला अस्पताल
बीकापुर/तारुन। क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चौरे बाजार में दोपहर 01:45 बजे ताला लगा मिला। कोछा पीएचसी पर दोपहर दो बजे प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राकेश कुमार और वार्डबॉय मिले। लैब टेक्नीशियन न होने से एटीएम जांच मशीन भी बंद थी। तारुन क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पनभरिया में दोपहर एक बजे तक 22 मरीज पहुंचे थे। मरीजों की जांच नहीं हो सकी और बिना जांच दवाएं दी गईं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र विजयनपुर सजहरा में फार्मासिस्ट प्रशांत जायसवाल ने मरीजों को देखकर दवाएं दीं।
डॉक्टर नहीं, फार्मासिस्ट ने संभाला मोर्चा
रुदौली। क्षेत्र के नरौली पीएचसी पर चिकित्सक डॉ. अंजीता अनुपस्थित रहीं। फार्मासिस्ट राम सुमिरन ने मरीजों को देखा। यहां 33 मरीजों का परीक्षण हुआ। ऐहार पीएचसी पर भी डॉ. इकमाल खान नहीं पहुंचे। एएनएम सुमन मौर्या मरीजों को देखती मिलीं। शुजागंज पीएचसी में फार्मासिस्ट रामकिशन और एएनएम अनीता के सहारे करीब 15 मरीजों का उपचार हुआ। रानी बाजार क्षेत्र के कनैला पीएचसी में चिकित्सक डॉ. दिनेश प्रकाश ने 30 मरीजों का उपचार किया।
आरोग्य मेले में डॉक्टरों और कर्मचारियों को शाम चार बजे तक रहना चाहिए। मामले की जांच कराई जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। -डॉ. देवेंद्र कुमार भिटौरिया, मुख्य चिकित्सा अधिकारी