-रंगमहल में स्थापित भगवान राम व माता सीता का विग्रह
अयोध्या। रामनगरी में मां सीता का प्राकट्योत्सव वैशाख शुक्ल नवमी बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। अयोध्या में माता सीता परमेश्वरी के रूप में प्रतिष्ठापित हैं। रामनगरी के हजारों मंदिरों में भगवान श्रीराम के साथ माता जानकी का भी विग्रह स्थापित है। मान्यता है कि रामनगरी की प्रसिद्ध शक्तिपीठ छोटी देवकाली मंदिर में माता पार्वती विराजती हैं। इस पीठ की स्थापना माता जानकी ने ही की थी।
मणिरामदास जी की छावनी में स्थापित आराध्य को जानकीरमण के नाम से जाता जाता है और यह नाम स्वत: ही मां की महिमा का गान-बखान करता है। रसिक उपासना परंपरा के संत मां सीता की सखी के रूप में भगवान राम की उपासना करते हैं। इस परंपरा के संत स्त्री भाव में तो रहते ही हैं और कुछ इतने भाव में हो जाते हैं कि स्त्री का नाम और वेश भी अपना लेते हैं। रामनगरी की प्राचीन पीठ रंग महल में भगवान राम समेत चारों भाईयों के साथ उनकी पत्नियों के भी विग्रह स्थापित हैं।
श्रावण झूलनोत्सव में भगवान राम समेत चारों भाइयों की पत्नियों को भी झूलन पर विराज मानकर झूला झुलाया जाता है। सखी संप्रदाय का मंदिर होने के कारण यहां नित्य भगवान राम को शयन कराते समय पुजारी सखी का रूप धारण करते हैं, भगवान को सुलाने के लिए ये सखियां लोरी सुनाती हैं। यहां आरती में पुजारी घूंघट डालकर आरती करते हैं। स्वर्गद्वार स्थित बावन मंदिर में प्रमुख रूप से किशोरी जी की पूजा की जाती है। यहां राम जी के साथ किशोरी जी का विग्रह भी पूजित-प्रतिष्ठित है।
सरयू तट पर स्थापित लक्ष्मण किला मंदिर में जनकपुर की परंपरा आज भी प्रवाहमान हैं। यहां रामनवमी, राम विवाह व सावन झूलनोत्सव पर बड़ी संख्या में सखियां जनकपुर से आती हैँ और उत्सव का आकर्षण बढ़ाती हैं। इसी तरह सियाराम किला, जानकीघाट बड़ा स्थान, श्रीरामवल्लभाकुंज समेत कई प्रमुख मंदिरों में माता किशोरी की पूजा-अर्चना की जाती है।