अयोध्या। राम मंदिर निर्माण समिति की बैठक के दूसरे दिन निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई। कार्यदायी संस्था के इंजीनियरों ने निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के समक्ष अब तक के हुए कार्यों का प्रजेंटेशन दिया। बैठक में तय हुआ है कि मार्च से परकोटा व सप्त मंडपम में लगने वाली मूर्तियां के अयोध्या पहुंचने का क्रम शुरू हो जाएगा। इससे पहले फरवरी के अंत में ट्रस्ट की टीम जयपुर जाकर मूर्तियां के निर्माण की प्रगति देखेगी।
मूर्तियों का निर्माण मूर्तिकार सत्यनारायण पांडेय कर रहे हैं। परकोटा में छह व सप्त मंडपम में सात मूर्तियां स्थापित की जानी है। जबकि तीर्थयात्री सुविधा केंद्र में बन रहे तुलसीदास के मंदिर में भी तुलसीदास की मूर्ति स्थापित की जाएगी। सप्त मंडपम का काम अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य है। सप्त मंडपम के सात मंदिरों में से अधिकांश मंदिरों का काम पूरा होने की ओर है। जबकि पर कोटा के चार मंदिरों का काम लगभग पूरा हो चुका है। वहीं शेषावतार मंदिर की फाउंडेशन का काम भी प्रारंभ किया जा चुका है। बताया गया कि सभी मूर्तियां संगमरमर के पत्थर पर बन रही हैं। मार्च से जैसे-जैसे सप्त मंडपम के मंदिर व परकोटा के मंदिर बनते जाएंगे मूर्तियों की स्थापना का काम भी शुरू कर दिया जाएगा। इसी को लेकर ट्रस्ट की एक टीम फरवरी के अंत में जयपुर जाकर मूर्ति के निर्माण कार्यों की समीक्षा व प्रगति देखेगी। बैठक में श्रद्धालुओं की भीड़ के चलते निर्माण कार्य की गति को लेकर भी चर्चा की गई है। निर्माण कार्य चलता रहे इसके लिए दिन की बजाय रात में भी ज्यादातर काम किए जा रहे हैं। बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव, आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा समेत अन्य मौजूद रहे।
परकोटा में लगने वाली म्यूरल की कोडिंग का काम भी तेजी से चल रहा है। राममंदिर के परकोटे में 80 म्यूरल लगाए जाने हैं। म्यूरल की साइज़ अलग-अलग होगी। कोडिंग के अनुसार ही म्यूरल को परकोटा में फिट किया जाएगा। अब तक 12 म्यूरल लगाने का काम पूरा किया जा चुका है। बैठक में राम मंदिर के 370 पिलर में उकेरी जा रही मूर्तियों के कार्य की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि अप्रैल के अंत तक सभी स्तंभों पर मूर्तियां उकेरने का काम पूरा कर लिया जाएगा।