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Human Trafficking : देवबंद ही नहीं... दिल्ली, मुम्बई और बंगलूरु तक भेजे गये बच्चे, वसूली जाती है मोटी रकम

Sun, 28 Apr 2024 05:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या/ लखनऊ

सार

शनिवार को राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. शुचिता चतुर्वेदी से बच्चों ने बताया कि बिहार के अररिया जिले के गांव करहरा निवासी शबे नूर उन्हें अलग-अलग मदरसों में भेजने का काम करता है।
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Demo Pic - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मानव तस्करी की आशंका में अयोध्या से शुक्रवार को बरामद किए गए 99 बच्चों में से कई बच्चे पहले भी सहारनपुर भेज चुके हैं, जहां मदरसों में पढ़ाई के नाम पर उनसे मजदूरी कराई गई और पीटा भी गया। पांच मौलवियों को हिरासत में लेकर पुलिस ने उनसे पूछताछ शुरू की है।

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शनिवार को राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. शुचिता चतुर्वेदी से बच्चों ने बताया कि बिहार के अररिया जिले के गांव करहरा निवासी शबे नूर उन्हें अलग-अलग मदरसों में भेजने का काम करता है। शबे नूर को बच्चे मामू कहते हैं। वह सहारनपुर के साथ ही दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, औरंगाबाद, बंगलूरू और आजमगढ़ के मदरसों में भी बच्चों को भेजता है। इसके बदले उसे मोटी रकम मिलती है।

शुक्रवार को सहारनपुर के दारुल उलूम रफाकिया मदरसा संचालक तौसीफ और दारे अरकम के रिजवान बच्चों को बस से ले जा रहे थे, जिन्हें राज्य बाल संरक्षण आयोग की पहल पर शुक्रवार को अयोध्या से मुक्त कराया गया। बस से मिले पांच मौलवियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है, वहीं बच्चों को लखनऊ स्थित मुमताल शरणालय में रखा गया। डॉ. शुचिता चतुर्वेदी ने बताया कि कुछ बच्चों के माता-पिता अयोध्या पहुंच गए हैं, कुछ पहुंच रहे हैं। उनके आने पर हलफनामा लेकर बच्चों को सौंप दिया जाएगा।
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तैयार कराते हैं हलफनामा
मदरसा संचालक हलफनामा तैयार कराते हैं, जिसमें लिखा होता है कि सभी तरह की जिम्मेदारी बच्चों की ही होगी। ऐसे में यदि किसी की मौत भी होती है तो संचालक की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। इसकी जानकारी अभिभावकों को नहीं होती। उस पर बच्चों के ही दस्तखत होते हैं।

मदरसे में रहकर कोई डाक्टर नहीं बनता..कहकर रोने लगा मासूम
भले ही मौलवी यह दावा करें कि बच्चों को दीनी तालीम के कारण सहारनपुर ले जाया जा रहा था, लेकिन बच्चों की अलग ही कहानी है। वे मदरसे में नहीं जाना चाहते। 14 साल के एक बच्चे ने तो साफ कहा कि वहां तो सिर्फ धर्म की बातें होती हैं। एक दूसरे बच्चे का कहना था कि मैं डाक्टर बनना चाहता हूं। मदरसे में रहकर भला कोई कैसे डाक्टर बन सकता है।

प्राथमिक स्कूलों के छात्र, फिर मदरसा क्यों
बाल आयोग की टीम ने बताया कि ज्यादातर बच्चे प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ते हैं। ऐसे में इन बच्चों को मदरसा क्यों भेजा जा रहा है, यह बड़ा सवाल है।

मौलवियों से चल रही पूछताछ : एसपी ग्रामीण
पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अतुल कुमार सोनकर ने बताया कि बच्चों के अभिभावक बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश होंगे। उनके बयानों के आधार पर यदि कोई शिकायत मिलती है तो समिति के अध्यक्ष की ओर से कार्रवाई शुरू की जाएगी। मौलवियों से पूछताछ की जा रही है।

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