अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर पर्यावरणीय संतुलन और हरित विकास का भी प्रतीक बनता जा रहा है। राम मंदिर के कुल निर्धारित क्षेत्र में से लगभग 20 एकड़ भूमि पर हरियाली विकसित करने का काम पूरा कर लिया गया है। यह काम कुबेर टीला, अंगद टीला, पीएफसी क्षेत्र और राम मंदिर के आसपास किया गया है। इसे जीएमआर कंपनी ने किया है।
राम मंदिर परिसर में हरियाली विकसित करने की यह योजना दीर्घकालिक है। इसके तहत परिसर के कुल क्षेत्रफल का लगभग 70 प्रतिशत भाग हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाना है। इसी क्रम में पहले चरण में 20 एकड़ क्षेत्र में पौधरोपण, घास, सजावटी पौधों और छायादार वृक्षों को लगाया गया है। इससे न केवल मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ी है, बल्कि श्रद्धालुओं को भी शुद्ध वातावरण और प्राकृतिक शांति का अनुभव हो रहा है।
कुबेर टीला और अंगद टीला जैसे ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व वाले स्थलों पर विशेष ध्यान देते हुए पारंपरिक और स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इनमें पीपल, बरगद, नीम, अशोक, आम व अर्जुन जैसे दीर्घायु और पर्यावरण के लिए उपयोगी वृक्ष शामिल हैं। इसके साथ ही फूलों और सजावटी पौधों से इन क्षेत्रों को सुंदर स्वरूप दिया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ प्रकृति से जुड़ाव भी महसूस हो।
राम मंदिर के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि राम मंदिर के आसपास विकसित की गई हरियाली का उद्देश्य केवल सुंदरीकरण नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, तापमान संतुलन और प्रदूषण नियंत्रण भी है। बड़ी संख्या में प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं के कारण क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है, ऐसे में हरित क्षेत्र एक प्राकृतिक कार्बन सिंक के रूप में काम करेगा। वर्षा जल संचयन की व्यवस्था भी की जा रही है, जिससे पौधों को न्यूनतम जल में पर्याप्त पोषण मिल सके।
रामनवमी तक पूरा हो जाएगा शू रैक का काम
राम जन्मभूमि परिसर में श्रद्धालुओं के जूता-चप्पल जमा करने के लिए शू रैक का निर्माण तेजी से चल रहा है। तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र व परकोटा के पास एक-एक शू रैक बन रहा है। दोनों रैक में एक साथ 25 हजार लोगों के जूता-चप्पल जमा किए जा सकेंगे। दिन भर में एक से सवा लाख लोगों के जूता चप्पल जमा हो सकेंगे। साथ ही परिसर के अंदर श्रद्धालुओं के सामान जमा करने के लिए काउंटर भी बढ़ाए जा रहे हैं। शू रैक के निर्माण का 70 फीसदी काम पूरा हो गया है। मार्च के पहले सप्ताह तक रैक बनकर तैयार हो जाएंगे।