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Ayodhya News: 27 साल बाद मिला न्याय, चकबंदी पेशकार को 25 साल की जेल

Wed, 22 May 2024 11:05 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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अयोध्या। धोखाधड़ी आर्थिक लाभ की लालच व पद का दुरुपयोग करते हुए न्यायालय की फाइल में हेराफेरी करना चकबंदी अधिकारी सदर के तत्कालीन पेशकार विनोद को भारी पड़ गया। दोषी करार अभियुक्त विनोद के आचरण को कदाचार की श्रेणी में पाते हुए 25 साल के कठोर कारावास व दो लाख रुपये जुर्माना से दंडित किया है।
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यह फैसला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम बलराम दास ने अभियुक्त को वीडियो कांफ्रेंस के जरिये बुधवार को सुनाया। जुर्माने की धनराशि दो लाख रुपये में से एक लाख 80 हजार रुपये परिवादिनी छेदाना के दो पुत्रों को बराबर-बराबर दिए जाने का आदेश पारित किया है।
परिवाद पत्र के मुताबिक चकबंदी अधिकारी सदर की कोर्ट में राम बक्श बनाम शिव नरायन का मुकदमा जमीन के बाबत चल रहा था। राम बक्श के दो लड़के मैकू लाल व अमरेश बहादुर नाबालिग थे। राम बक्श की पत्नी परिवादिनी छेदाना ही कोर्ट में पैरवी करने आती थी। 29 मई 97 की सुबह 8 बजे गांव में पता चला कि पेशकार विनोद ने मुकदमे में बैक डेट में फैसला करवा दिया है। कोर्ट में जाकर फाइल का मुआयना करवाया तो पता चला कि विनोद ने धोखाधड़ी से आर्थिक लाभ की लालच में अपने पद का दुरुपयोग किया। पत्रावली में हेरा-फेरी करके चकबंदी अधिकारी को गुमराह किया और 17 मई 97 को ही आदेश करवा दिया। न्यायालय ने सबूत के मूल्यांकन के आधार पर तत्कालीन पेशकार विनोद के कृत्यों को आर्थिक अपराध के साथ-साथ सामाजिक अपराध की श्रेणी का पाया। कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि विनोद के कार्यों ने न्यायिक व्यवस्था को संदेह के घेरे में ला दिया। दोषी का आचरण कदाचार के श्रेणी में आता है।
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न्यायालय ने दोष सिद्ध अभियुक्त विनोद को धोखाधड़ी के अपराध में सात वर्ष के कठोर कारावास 50 हजार जुर्माना, जालसाजी के अपराध में सात वर्ष के कठोर कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना, कूट रचित दस्तावेज तैयार करने के अपराध में सात साल के कठोर कारावास व 50 हजार जुर्माना, कपट पूर्वक कूट रचना करना के अपराध में दो वर्ष के कठोर कारावास एवं 25 हजार रुपये जुर्माना व गाली गलौज करने के मामले में दो साल के कठोर कारावास व 25 हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी
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