अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ प्रतिष्ठा द्वादशी के रूप में मनाई जाएगी। 29 दिसंबर से रामकथा समेत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का श्रीगणेश होगा। यह पहला अवसर है जब राम मंदिर परिसर में बालक राम पर केंद्रित विशेष कथा का आयोजन होने जा रहा है। यह कथा श्रद्धालुओं को रामलला के बाल स्वरूप से परिचित कराएगी।
यह रामकथा इस लिहाज से भी अधिक मायने रखती है, क्योंकि राम मंदिर में विराजमान रामलला का स्वरूप पांच वर्ष के बालक का है। कथा के माध्यम से श्रद्धालु बालक राम के जीवन प्रसंगों, उनके अलौकिक गुणों और मर्यादा पुरुषोत्तम बनने की प्रारंभिक यात्रा को आत्मसात कर सकेंगे। कथा प्रवाचक जगद्गुरु राम दिनेशाचार्य कहते हैं कि राम बालक रूप में भी लोकमंगल और धर्म का संदेश देते हैं। बालक राम की कथा मानव को यह प्रेरणा देती है कि संस्कारों की नींव बचपन में ही पड़ती है और वही आगे चलकर जीवन की दिशा तय करती है। भगवान शिव के भी आराध्य बालक राम ही हैं। बालक राम की लीलाओं, उनके सौम्य स्वभाव, करुण दृष्टि और धर्म के बीज रूप संस्कारों को कथा के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
राम मंदिर के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र कहते हैं कि यह कथा श्रद्धालुओं को राम के उस रूप से जोड़ने का प्रयास है, जिसमें शक्ति के साथ सौम्यता, मर्यादा के साथ ममता और धर्म के साथ करुणा का अद्वितीय समन्वय दिखाई देता है। यह आयोजन विशेष रूप से बच्चों, युवाओं और परिवारों को राम के बाल स्वरूप से जोड़ने का माध्यम बनेगा।