अयोध्या। रामनगरी में दीपोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। दीपोत्सव का भव्य आयोजन पांच से सात अक्तूबर तक होगा। इस बार दीपोत्सव को हर बार की अपेक्षा और अधिक भव्य बनाने की तैयारी है। दीपोत्सव में वाराणसी व गुजरात की लोककलाओं का संगम नजर आएगा तो वहीं देश भर के करीब तीन हजार से अधिक लोक कलाकार संस्कृति के विविध रंगाें की छटा बिखेरेंगे।
अबकी बार अयोध्या अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है। दीपोत्सव में कुल 30 लाख दीये प्रज्ज्वलित करने की योजना है। भारत के कोने-कोने से आने वाले लोक कलाकार दीपोत्सव को और भव्य बनाएंगे। दीपोत्सव में इस बार डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय कुछ अलग अंदाज में नजर आएगा। विश्वविद्यालय परिसर की सजावट को केवल रोशनी और आधुनिक डेकोरेशन तक सीमित रखने के बजाय इसमें देश की लोक संस्कृति का रंग भरने की तैयारी है।
विश्वविद्यालय की संयोजन समिति ने सजावट के लिए अलग रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है। प्रवेश द्वार, मुख्य मार्ग, मंडप और प्रमुख आयोजन स्थलों पर फूलों और पारंपरिक सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। गुजरात की रंग-बिरंगी वंदनवार के साथ वाराणसी की फूल सजावट का संयोजन परिसर को अलग सांस्कृतिक स्वरूप देगा। सामग्री के चयन के लिए संयोजन समिति के सदस्य जल्द वाराणसी और गुजरात का दौरा करेंगे। वहां स्थानीय कलाकारों और आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क कर सामग्री का चयन किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का जोर इस बात पर है कि सजावट में स्थानीय संस्कृति के साथ देश के दूसरे हिस्सों की लोक परंपराओं को भी स्थान मिले।
झांकियों और प्रवेश द्वारों पर रहेगा विशेष जोर
- दीपोत्सव में विश्वविद्यालय परिसर के प्रवेश द्वार और प्रमुख स्थलों पर लोक कला आधारित सजावट करने की तैयारी है। फूलों, दीपों, वंदनवार और प्रकाश व्यवस्था का संयोजन कर अलग-अलग हिस्सों को अलग थीम देने की योजना है। झांकियों और मंडपों में भी पारंपरिक कला की झलक दिखाई देने की तैयारी है। यही नहीं राम की पैड़ी परिसर में भी विशेष थीम पर रंगोली व अन्य सजावट की योजना है। इसके अलावा पर्यटन व संस्कृति विभाग की ओर से भी अयोध्या को भव्यतम रूप देने की कवायद शुरू हो गए हैं।