रुदौली। आजादी के 79 साल बाद भी क्षेत्र के बांस गांव के लोगों को बिजली नसीब नहीं हो सकी है। बच्चे पढ़ने बैठने से पहले आसमान देखते हैं कि आज धूप कितनी निकली। सोलर ठीक से चार्ज हुआ होगा, तभी कुछ देर पढ़ाई हो पाएगी। बांस गांव निवासी श्याम नारायण की ये बातें गांव की हकीकत बयां करती हैं। सोलर की बैटरी खत्म होते ही रोशनी और पढ़ाई दोनों रुक जाती हैं।
यह स्थिति किसी दूरदराज इलाके की नहीं, बल्कि रुदौली विधानसभा के ग्राम पंचायत लोहटी के मजरे नयापुरवा स्थित बांस गांव की है। यहां अब भी बिजली और पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच सकी हैं। करीब 85 घरों वाले इस गांव में अधिकतर मकान कच्चे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, उन्हें सरकारी आवास योजना का लाभ भी नहीं मिला।
बिजली न होने से शाम ढलते ही गांव अंधेरे में डूब जाता है। पहले लोग मिट्टी के तेल की लालटेन और लैंप का सहारा लेते थे, लेकिन वर्ष 2019 में राशन दुकानों पर मिट्टी के तेल की बिक्री बंद होने के बाद वह विकल्प भी खत्म हो गया। पिछले दो वर्षों से कुछ परिवार छोटे सोलर पैनलों के सहारे गुजारा कर रहे हैं, लेकिन बारिश और सर्दी में धूप न निकलने से वे भी बेअसर हो जाते हैं।
गांव में सिर्फ चार सोलर स्ट्रीट लाइटें लगी हैं, जिनकी रोशनी सीमित क्षेत्र तक ही पहुंचती है। बाकी गलियां और घर रात होते ही अंधेरे में डूब जाते हैं। अंधेरे के कारण जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। गर्मी में लोग हाथ के पंखे से रात काटने को मजबूर हैं।
बारिश के मौसम में पक्की सड़क न होने से हालात और बिगड़ जाते हैं। रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं, जिससे आवाजाही मुश्किल हो जाती है। ग्रामीण रामदीन, राजकुमार और ननके का कहना है कि बिजली और सड़क की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन आश्वासनों के बावजूद समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि विकास योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं, जबकि गांव आज भी मुख्यधारा से दूर है।
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क्षेत्रीय विधायक रामचंद्र यादव ने बताया कि बांस गांव को प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) में शामिल किया गया है। जल्द ही विद्युतीकरण का कार्य शुरू कराया जाएगा।