अयोध्या। सूर्य की तेज तपिश और लू के थपेड़ों ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। ऐसे में आयुर्वेद विशेषज्ञों ने लू (हीटस्ट्रोक) से बचाव के लिए पंचसूत्र साझा किए हैं। आयुर्वेदिक ऋतुचर्या के पालन से लोग लू (हीटस्ट्रोक) के प्रभाव से बचा सकता है। इन उपायों में प्राकृतिक पेय और सही दिनचर्या पर विशेष जोर दिया गया है।
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी डॉ. महेंद्र सिंह विष्णु के मार्गदर्शन में आमजन को सुरक्षित रखने के लिए विशेष उपाय साझा किए गए। उन्होंने बताया कि ग्रीष्म ऋतु आदान काल होती है, जिसमें सूर्य की गर्मी शरीर के ओज और बल को कम करती है। ऐसे में समय रहते सावधानी बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों ने शरीर को अंदर से ठंडा रखने और पित्त दोष को शांत करने पर जोर दिया है। उन्होंने दोपहर 12 से चार बजे तक तेज धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों ने बताया कि आम पन्ना, छाछ, सत्तू का घोल, नारियल पानी, बेल का शरबत और सौंफ धनिया का पानी शरीर को ठंडक देते हैं और डिहाइड्रेशन से बचाते हैं। चीनी की जगह मिश्री का उपयोग अधिक लाभकारी है। आहार में हल्का और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए। खीरा, तरबूज, खरबूजा और अनार जैसे शीतल प्रकृति के फल लाभदायक हैं, जबकि तैलीय और मसालेदार भोजन से दूरी बनानी चाहिए।