शारदा सहायक नहर रुदौली डाक बंगला के बगल दिखी डॉल्फिन।
भेलसर (अयोध्या)। रुदौली डाक बंगला के बगल शारदा सहायक नहर में तैरती हुई डॉल्फिन देखी गई। जो लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है। एक पखवाड़ा पूर्व डॉल्फिन मवई क्षेत्र में शारदा सहायक नहर में देखी गई थी। जिसकी जानकारी वन विभाग को दी गई थी। उस समय नहर में पानी फुल स्केप में चल रहा था। जिसके कारण वन विभाग डॉल्फिन को ट्रैक नहीं कर पाया था।
दो दिन पूर्व से शारदा सहायक नहर का पानी घटने लगा। इस कारण रुदौली डाक बंगला के बगल नहर में सुबह डॉल्फिन को अठखेलियां करते राहगीरों ने देखा। कुछ घंटे बाद डॉल्फिन को पश्चिम की ओर पानी की उल्टी दिशा में जाते हुए ग्राम डेहवा के ग्रामीणों ने देखा। इस दौरान लोग मछली के पीछे-पीछे दौड़ने लगे। ग्रामीणों को काफी देर बाद पता चल कि वह डॉल्फिन है। इसकी जानकारी वन क्षेत्राधिकारी रुदौली को दी गई। सूचना पर वन विभाग की टीम जाल लेकर मौके पर पहुंची, लेकिन डॉल्फिन ट्रैक नहीं हाे पाई।
थोड़ी ही देर के बाद गुलचप्पा ठोकर के निकट ग्रामीणों ने डॉल्फिन को तैरते हुए देख वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। डॉल्फिन को देखने के लिए राहगीरों की भीड़ जमा हो गई। जानकारी मिलने पर वन विभाग की टीम जाल लेकर वहां पहुंच गई। ग्रामीणों का कहना है कि नहर का पानी काफी घट जाने के कारण गुलचप्पा ठोकर पर इतना पानी नहीं है कि डॉल्फिन उस पार जा सके। रुदौली डाक बंगला व गुलचप्पा ठोकर के बीच वन विभाग की टीम जाल द्वारा डॉल्फिन को पकड़ लेगी।
वन क्षेत्राधिकारी रुदौली जेपी गुप्ता ने बताया कि शारदा सहायक नहर में एक डॉल्फिन देखे जाने की सूचना कुछ लोगों के द्वारा मिली है। वन विभाग की टीम उसे पकड़ने का प्रयास कर रही है। उसे पकड़कर किसी अन्य नदी में छोड़ा जाएगा।
डॉल्फिन की खासियत
5 अक्तूबर, 2009 को गंगेटिक डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया था। केंद्र सरकार इसे 1972 में भारतीय वन जीव संरक्षण कानून के दायरे में लेकर आई। डॉल्फिन स्तनधारी और नेत्रहीन जलीय जीव होती है। यह कंपन वाली आवाज निकालती है, जो किसी भी चीज से टकराकर वापस डॉल्फिन के पास आ जाती है। इससे उसे पता चल जाता है कि शिकार कितना बड़ा और कितने करीब है। डॉल्फिन आवाज और सीटियों के द्वारा एक दूसरे से बात करती हैं। जबकि यह 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तैर सकती है।