अयोध्या। जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में तैनात रहे डॉ. विनोद कुमार सिंह की संदिग्ध डिग्री सत्यापन के लिए केजीएमयू भेजी गई है। एमडी मेडिसिन की इस डिग्री के वर्ष 2018 में केजीएमयू से जारी होने की बात सामने आई है। सत्यापन के बाद तस्वीर साफ होने पर अग्रिम कार्रवाई का दावा किया जा रहा है।
लगभग छह माह पहले जिला अस्पताल में डॉ. विनोद कुमार सिंह की बतौर कार्डियोलॉजिस्ट तैनाती हुई थी। वह जिला अस्पताल की ओपीडी के कक्ष संख्या 16 में बैठक ह्रदय रोगियों व मेडिसिन विभाग से संबंधित मरीजों का इलाज कर रहे थे। अब तक तो सब ठीकठाक चलता रहा, लेकिन अप्रैल के आखिरी सप्ताह से ही उनकी डिग्री को लेकर सवाल उठने लगे थे।
उनकी डिग्रियों को पी-2 पोर्टल पर अपलोड कराया गया तो केजीएमयू से जारी एमडी मेडिसिन की डिग्री में सीरियल नंबर दर्ज नहीं था। वहीं, गोरखपुर मेडिकल कॉलेज से जारी एक अन्य डिग्री पर भी संदेह हुआ। इसकी हकीकत सामने आने तक जिला अस्पताल प्रशासन ने उनका अप्रैल का वेतन रोक दिया। इस बीच उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर त्यागपत्र दे दिया। इससे डिग्री संदिग्ध होने की आशंकाएं और प्रबल हो गईं।
मामला सुर्खियों में आया तो अस्पताल प्रशासन ने केजीएमयू व गोरखपुर मेडिकल कॉलेज से उनकी डिग्रियों का सत्यापन कराने की प्रक्रिया शुरू की। प्रमुख अधीक्षक डॉ. उत्तम कुमार ने बताया कि डॉ. विनोद कुमार सिंह की एमडी मेडिसिन की डिग्री पर संदेह है। मामले से शासन को अवगत कराते हुए डिग्रियों का सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद अग्रिम कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
राष्ट्रपति समेत अन्य वीवीआईपी दौरों पर भी ड्यूटी कर चुके हैं डॉ. विनोद
-बतौर कार्डियोलॉजिस्ट तैनाती के दौरान डॉ. विनोद कुमार सिंह समय-समय पर होने वाले वीवीआईपी दौरों में भी चिकित्सीय व्यवस्था का जिम्मा संभाल चुके हैं। एक मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन पर भी उन्होंने वीवीआईपी ड्यूटी की थी।
सूट-बूट में आते थे डॉ. विनोद, गिनाते थे अपना रसूख
-कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में तैनात डॉ. विनोद कुमार सिंह सूट-बूट पहनकर शान-शौकत से ओपीडी पहुंचते थे। वार्डों में भर्ती मरीजों का राउंड लेकर इलाज करते थे। इस बीच स्वयं के बड़े खानदान से होने का दावा करके अपना रसूख गिनाते नहीं थकते थे। मीडियाकर्मियों से मुलाकात होने पर स्वयं को एक पत्रिका उप संपादक भी बताते थे।