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Ayodhya News: फर्जी निकली डॉक्टर की डिग्री, खतरे में 10,000 रोगियों की जान

Fri, 17 May 2024 12:58 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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अयोध्या। जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में तैनात रहे डॉक्टर की एमडी मेडिसिन की डिग्री फर्जी निकली है। ऐसे में पिछले लगभग पांच माह से डॉक्टर से इलाज करा चुके लगभग 10,000 मरीजों की जान भी खतरे में आ गई है। उन्हें गलत इलाज का भय सताने लगा है। इनमें कुछ मरीज तो अन्य चिकित्सकों के पास पहुंचकर नये सिरे से इलाज कराने लगे हैं।
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जिला अस्पताल में काफी समय से ह्रदय रोग विशेषज्ञ समेत सुपर स्पेशियलिटी के चिकित्सकों की तैनाती नहीं थी। ओपीडी सेवाओं के लिए भी लखनऊ या दिल्ली पर ही निर्भर होना पड़ता था। इस बीच 23 सितंबर, 2023 को कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में सेवाएं देने के लिए डॉ. विनोद कुमार सिंह यहां पहुंचे तो जनपद वासियों को उम्मीद जगी। ज्वाइन करते ही वह गायब हो गए और लगभग दो माह बाद वापस आए और ह्रदय रोगियों का इलाज करते रहे। वार्डों में भर्ती मरीजों का राउंड लेकर उन्हें परामर्श व दवाएं देते रहे।

जिला अस्पताल की ओपीडी सामान्य दिनों में भी खचाखच भरी रहती है। औसतन एक डॉक्टर के पास रोज 100 से अधिक मरीज यहां पहुंचते हैं। प्रतिमाह यदि उन्होंने न्यूनतम 24 दिन भी ओपीडी की हो और न्यूनतम 80 मरीज रोज देखे हों तो उन्होंने अब तक ओपीडी में लगभग 10,000 मरीजों का इलाज किया होगा।
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वहीं, वार्डों में रोज लगभग 15-20 मरीजों का वह इलाज करते थे। इस बीच अचानक उनकी डिग्री फर्जी होने की सूचना से उनसे लगभग पांच माह से इलाज करा रहे मरीजों में भी हड़कंप मचा है। उन्हें गलत इलाज के कारण अपनी सेहत का खतरा भी सताने लगा है।

फर्जी है केजीएमयू की डिग्री
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. उत्तम कुमार ने बताया कि डॉ. विनोद कुमार सिंह की वर्ष 2018 में जारी हुई एमडी मेडिसिन की डिग्री का सत्यापन केजीएमयू से कराया गया है। यह डिग्री वहां से नहीं जारी हुई है, इसलिए फर्जी है। अग्रिम कार्रवाई के लिए शासन को पत्राचार किया गया है।

बगैर कागजात के सत्यापन कैसे मिली ज्वाइनिंग
जिला अस्पताल में सेवाएं देने से पहले भी चिकित्सक के कागजात का सत्यापन हुआ होगा, लेकिन डिग्री को लेकर कोई सत्यापन नहीं किया गया। ऐसे में चिकित्सक को ज्वाइन कराने वालों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन पूरा ठीकरा नियुक्ति करने वालों के सिर पर ही फोड़ रहा है। उनका कहना है कि शासन ने नियुक्ति करके अस्पताल में तैनाती कर दी तो यह माना गया कि चिकित्सक की डिग्री सही होगी। हालांकि, मामले की सही ढंग से जांच हुई तो कई लोगों की असलियत भी सामने आ सकती है।
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