अयोध्या। जैन मंदिर में पंच कल्याणक महोत्सव की अद्भुत छटा बिखर रही है। इसी क्रम में मंगलवार को भगवान का दीक्षा कल्याणक मनाया गया। जैन मंदिर में स्थापित होने वाली 1800 प्रतिमाओं का 1008 कलशों के दिव्य जल से अभिषेक भी किया गया। सभी मूर्तियों का भव्य अभिषेक हुआ तो जयकारे गूंजते रहे।
इससे पहले दीक्षा कल्याणक की बारी आने के साथ भगवान को निर्वस्त्र कर कठोर तपस्या के लिए तैयार किया गया, ताकि वह मानवता का श्रेष्ठतम ज्ञान प्राप्त कर सकें। प्रभु अपने महल से जंगल की और निकलते हैं। देवी देवता और सभी मनुष्य लोग प्रभु के साथ निकलते हैं। प्रभु को पालकी में बिठाकर लेकर जाते हैं। जंगल में प्रभु उतरते हैं। सभी वस्त्र आभूषणों का त्याग करते हैं और लोच करते हैं।
तड़के ही प्रतिष्ठा महोत्सव का आरंभ प्रथम तीर्थंकर की पूर्व प्रतिष्ठित मूर्ति का पंचामृत अभिषेक किए जाने से हुआ। अगले चरण में गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता, आचार्य भद्रबाहु, पीठाधीश रवींद्र कीर्ति स्वामी एवं प्रज्ञाश्रमणी चंदनामती माता के उद्बोधन से आस्था का औचित्य प्रतिपादित हुआ।
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पंच कल्याणक महोत्सव से प्राप्त होता है मुक्तिमार्ग का संदेश
जैन मंदिर के पीठाधीश रवीन्द्र कीर्ति स्वामी कहते हैं कि पंच कल्याणक महोत्सव में जिनवाणी सेवक विद्वानों के द्वारा मुक्तिमार्ग के स्वरूप का एवं उसे प्राप्त करने के उपायों का प्रतिपादन भी होता है। हमें मुक्तिमार्ग का संदेश, इस महोत्सव से प्राप्त होता है। यदि हम भी सही वस्तु-स्थिति समझ कर, उस दिशा में प्रयत्न करें तो भव-भ्रमण से छूट कर, सादि-अनंत काल के लिए अनंत सुखी हो सकते हैं। हम सभी भव्यात्माएँ, इस महोत्सव के माध्यम से संसार-परिभ्रमण से मुक्त होकर अनंत सुखी हों यही मंगल भावना है।