अयोध्या। वैशाख शुक्ल पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा) को रामनगरी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। बृहस्पतिवार सुबह से ही मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए तांता लगा रहा। इससे पूर्व बड़ी संख्या में उमड़े भक्तों ने सरयू में डुबकी लगाई। भीषण गर्मी एवं चटख धूप ने भी श्रद्धालुओं के धैर्य की परीक्षा ली। भक्तों ने सरयू स्नान कर विभिन्न मंदिरों नागेश्वरनाथ, कनक भवन, हनुमानगढ़ी, रामलला के दरबार में माथा टेका। दर्शन और पूजन का यह क्रम देर शाम तक चलता रहा।
बुद्ध पूर्णिमा वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इसे वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन को भगवान गौतम बुद्ध की जयंती और उनके निर्वाण दिवस दोनों के ही तौर पर मनाया जाता है। इसी दिन भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। ऐसी मान्यता है कि वैशाख की पूर्णिमा को ही भगवान विष्णु ने अपने नौवें अवतार भगवान बुद्ध के रूप में जन्म लिया। कहते हैं कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में किया गया स्नान कई जन्मों के पापों का नाश करता है।
इसी मान्यता के चलते ब्रह्ममुहूर्त से ही रामनगरी में उमड़े भक्तों ने पावन सलिला सरयू में डुबकी लगाई। इस बार सरयू के स्नानघाटाें पर पानी कम होने से श्रद्धालुओं को परेशानी हुई। सरयू में स्नान के बाद भक्तों ने गोदान, वस्त्र व अन्न का दान किया। इसके बाद मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भक्त उमड़ पड़े।
रामलला के दरबार में रही लंबी कतार
भीड़ का सबसे ज्यादा दबाव राममंदिर व हनुमानगढ़ी में रहा। सिंहद्वार से लेकर राममंदिर की सीढि़यों तक करीब दो सौ मीटर लंबी कतार लगी रही। जय श्रीराम के जयकारों से पूरा मंदिर सुबह से लेकर रात शयन आरती तक गूंजता रहा। राममंदिर ट्रस्ट की ओर से दर्शनपथ पर जगह-जगह कूलर व पंखे लगाए गए हैं। इसी तरह हनुमानगढ़ी में भक्तों का रेला रहा। यहां भक्तिपथ पर छांव की व्यवस्था न होने से श्रद्धालु बेहाल नजर आए।