लक्ष्मण किला में पूजन करते सूर्य प्रकाश शरण।
अयोध्या। शरद पूर्णिमा पर रामनगरी के मंदिरों में सोमवार की आधी रात आस्था का उल्लास छाया रहा। विशेष पूजन-अर्चन के लिए मंदिरों के पट खोले गए और रात 12 बजे भगवान की आरती उतारी गई। कनक भवन, दशरथ महल, हनुमानगढ़ी और लक्ष्मण किला सहित प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भगवान को विशेष रूप से तैयार खीर का भोग अर्पित किया गया। भजन-कीर्तन और जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठे।
शरद पूर्णिमा पर रामनगरी के मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन किए गए। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व होता है। इसी विश्वास के चलते श्रद्धालु खीर तैयार कर भगवान को अर्पित करते हैं। पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा निभाई गई।
कनक भवन और दशरथ महल में भगवान के दर्शन-पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। हनुमानगढ़ी में भक्तों ने बजरंगबली के दर्शन किए। लक्ष्मण किला सहित अन्य मंदिरों में भी विशेष आरती और भजन-कीर्तन हुए। लक्ष्मण किला के अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने बताया कि आधी रात भगवान की उत्सव मूर्ति को मंदिर के आंगन में विराजमान कराकर पूजा-अर्चना की गई। स्वर साधकों ने भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
राम जन्मभूमि मंदिर में मध्यरात्रि हुई महाआरती
अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर में शरद पूर्णिमा का पर्व विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया गया। देर रात भगवान रामलला की चल मूर्ति को गर्भगृह से निकालकर उत्तरी चबूतरे पर विराजमान कराया गया। इसके बाद मध्यरात्रि 12 बजे आरती हुई और भगवान को विशेष रूप से तैयार खीर का भोग अर्पित किया गया। राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के बाद पहली बार शरद पूर्णिमा पर इतने विशेष आयोजन के साथ पर्व मनाया गया। पूजन कार्यक्रम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य एवं निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास, धार्मिक समिति के सदस्य अधिकारी राजकुमार दास और मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।