अयोध्या। उच्चाधिकारियों की सख्ती के बावजूद कई आशा बहुएं संस्थागत प्रसव में कई रुचि नहीं ले रही हैं। बीते माह 334 आशा बहुओं ने माह में तीन से भी कम प्रसव कराए हैं। सीएमओ ने इनमें सुधार के लिए संबंधित ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधकों को निर्देशित किया है। सुधार न होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
जिला महिला अस्पताल समेत 14 सीएचसी, 28 पीएचसी और मेडिकल कॉलेज में प्रसव संबंधी सेवाएं संचालित हैं। यहां गर्भवती महिलाओं के संस्थागत प्रसव में सहयोग के लिए जिले भर में 2,238 आशा बहुएं तैनात हैं। इन्हें जननी सुरक्षा योजना के तहत विभिन्न सेवायें प्रदान कराने, नियमित टीकाकरण, गर्भावस्था के दौरान उनकी विशेष देखभाल करने और सुरक्षित प्रसव कराने की इनकी जिम्मेदारी है। इसके लिए उन्हें प्रति केस पारिश्रमिक मिलता है।
संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए इन्हें हर माह निर्देशित किया जाता है, लेकिन कई आशा बहुएं इसके प्रति बेफिक्र हैं। दिसंबर में 20 आशा बहुओं ने सिर्फ एक, 44 ने दो और 126 ने तीन प्रसव कराए हैं। जबकि, अमानीगंज और मिल्कीपुर में एक-एक आशा बहुओं का खाता भी नहीं खुला है।
इनसेट
तारुन और हैरिंग्टनगंज में सर्वाधिक संख्या
प्रसव कार्य में रुचि न लेने वाली सर्वाधिक आशा बहुयें तारुन और हैरिंग्टनगंज ब्लॉक में चिह्नित हुई हैं। तारुन में इनकी संख्या सर्वाधिक 59 और हैरिंग्टनगंज में 52 है। इसके अलावा मया बाजार में 45, मिल्कीपुर में 39, सोहावल और अमानीगंज 30-30 आशा बहुएं चिह्नित हुई हैं, जिन्होंने माह में तीन से भी कम प्रसव कराए हैं।
सीएमओ डॉ. देवेंद्र कुमार भिटौरिया ने बताया कि जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में संस्थागत प्रसव बढ़ाने को लेकर निर्देश मिले हैं। जिले के सभी बीसीपीएम को आशाओं के कार्यों की समीक्षा करके सुधार कराने का निर्देश दिया गया है। अपेक्षित सुधार न होने पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।