अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा और दानराशि प्रबंधन को लेकर उठे विवाद के बीच मंदिर की व्यवस्थाओं को नए सिरे से व्यवस्थित करने पर गंभीर मंथन शुरू हो गया है। सूत्रों के अनुसार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और पीएमओ के स्तर पर इस बात पर विचार चल रहा है कि भविष्य में राम मंदिर की व्यवस्थाओं को तिरुपति बालाजी मंदिर (तिरुपति देवस्थानम) की तर्ज पर अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और जवाबदेह बनाया जाए।
राम मंदिर में केवल पारंपरिक व्यवस्था के बजाय एक पेशेवर प्रशासनिक ढांचे की जरूरत महसूस की जा रही है। हाल में सामने आए विवाद और उसकी जांच के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि मंदिर प्रबंधन में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिसमें किसी भी स्तर पर अनियमितता की संभावना न्यूनतम रहे।
सूत्रों के अनुसार एसआईटी अपनी रिपोर्ट में दानपात्रों से प्राप्त राशि के संग्रहण, गणना, सीलिंग, परिवहन और बैंक में जमा करने की प्रत्येक प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जाने का सुझाव दे सकती है। इसके अलावा बहुस्तरीय निगरानी प्रणाली, विभिन्न स्तरों पर उत्तरदायित्व तय करने तथा समय-समय पर स्वतंत्र ऑडिट कराने जैसी व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित की जा सकती हैं। मंदिर परिसर में एक सशक्त प्रशासनिक संरचना विकसित करने की भी चर्चा है।
इसके तहत मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की तैनाती के साथ अलग-अलग विभाग बनाए जा सकते हैं। यूपी-उत्तराखंड इकोनॉमिक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. विनोद श्रीवास्तव ने बताया कि देश के बड़े धार्मिक संस्थानों में तिरुपति मॉडल को सुशासन, वित्तीय पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही के सफल उदाहरण के रूप में देखा जाता है।