अयोध्या। रामजन्मभूमि परिसर में प्रस्तावित ध्वजारोहण समारोह की तैयारियों को लेकर रविवार को हलचल तेज रही। प्रधानमंत्री के आगमन से पहले सुरक्षा और तकनीकी प्रबंधों की समीक्षा के लिए रक्षा मंत्रालय के विशेषज्ञों ने स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने भी पूरे परिसर का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया।
सूत्रों के अनुसार, विशेषज्ञ दल ने मंच, सुरक्षा घेरा, विद्युत व्यवस्था और स्वचालित ध्वजारोहण प्रणाली से जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की। बताया गया कि समारोह के दौरान ध्वज स्वचालित यंत्र से फहराया जाएगा, जिसकी विश्वसनीयता और सुरक्षा की परख विशेषज्ञों ने की।
नृपेंद्र मिश्र ने अधिकारियों और ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम श्रद्धा और तकनीक का सुंदर संगम होगा, अतः प्रत्येक व्यवस्था त्रुटिहीन होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि 191 फीट ऊंचे शिखर पर ध्वज फहराया जाना है, जो एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसलिए हर तकनीकि पहलू पर काम किया जा रहा है।
तैयारियों की समीक्षा के बाद यह सुनिश्चित किया गया कि अगले सप्ताह तक सभी तकनीकी परीक्षण पूरे कर लिए जाएंगे ताकि ध्वजारोहण समारोह ऐतिहासिक और भव्य रूप में सम्पन्न हो सके। इससे पहले नृपेंद्र मिश्र ने पूरे परिसर का निरीक्षण किया। एसपी सुरक्षा बलरामाचारी दुबे ने उन्हें सुरक्षा प्रबंधों की जानकारी दी। पीएम जिस मार्ग से मंदिर में प्रवेश करेंगे उसका भी निरीक्षण कर तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ़ अनिल मिश्र, निर्माण प्रभारी गोपाल राव, राम मंदिर के आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा समेत कार्यदायी संस्था के इंजीनियर मौजूद रहे।
अंतिम चरण में पहुंचा परकोटा में म्यूरल लगाने का काम
राम मंदिर के चारों ओर निर्मित 800 मीटर लंबे परकोटा में म्यूरल लगाने का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। राम जन्म से लेकर राम राज्याभिषेक तक के प्रसंग को दर्शाते कुल 87 म्यूरल लगाए जाने हैं। इनमें 70 से अधिक म्यूरल लगाने का काम पूरा हो चुका है। वंशीपहाड़पुर के लाल पत्थरों पर रामकथा के प्रसंग उकेरे गए हैं। इसी तरह मंदिर की लोअर प्लिंथ में 80 म्यूरल लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। राम मंदिर के दूसरे तल की फिनिशिंग का काम भी लगभग पूरा है। नृपेंद्र ने इन सभी कार्यों का निरीक्षण किया।