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Ayodhya News: कनौसा कॉन्वेंट स्कूल प्रकरण में अधूरी जांच पर सीडब्ल्यूसी सख्त

Sat, 02 May 2026 09:13 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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-अभिभावक की शिकायत के बाद बाल कल्याण समिति ने शुरू की जांच
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अयोध्या। कैंट क्षेत्र स्थित कनौसा कॉन्वेंट स्कूल से जुड़े विवाद में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने अधूरी जांच पर कड़ा रुख अपनाया है। समिति के अध्यक्ष सर्वेश अवस्थी ने बीएसए को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि पूर्व में कराई गई जांच अपूर्ण है और शेष दो बिंदुओं पर फिर से जांच कर रिपोर्ट सौंपने सौंपी जाए। यह मामला नर्सरी की छात्रा से जुड़ा है।
बाल कल्याण समिति ने छह अप्रैल को तीन बिंदुओं पर जांच के निर्देश दिए थे। पहला बिंदु यह था कि लगभग 16 हजार रुपये प्रवेश शुल्क जमा करने के बावजूद विद्यालय प्रशासन अभिभावक से बार-बार दस्तावेज और शपथपत्र की मांग की और सत्यापन न होने पर प्रवेश निरस्त करने की चेतावनी दी गई। इस बिंदु पर खंड शिक्षा अधिकारी तारकेश्वर पांडेय ने जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें विद्यालय का पक्ष रखते हुए कहा गया कि शिकायत पुरानी है और छात्रा वर्तमान में नियमित रूप से अध्ययनरत है।
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दूसरा बिंदु विद्यालय की ओर से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए कुछ निर्धारित दुकानों अवध स्टेशनरी मार्ट, टंडन बुक डिपो, सागर स्कूल ड्रेस और लोकप्रिया स्कूल ड्रेस का नाम बताने से संबंधित था। तीसरा बिंदु विद्यालय की मान्यता को लेकर था, जिसमें अभिलेखों के अनुसार 29 जून 2016 को मिली अनंतिम मान्यता 29 जून 2019 तक ही वैध थी और इसके नवीनीकरण का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। खंड शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट में केवल पहले बिंदु की जांच की पुष्टि हुई, जबकि दूसरे और तीसरे बिंदु पर कोई स्पष्ट जांच नहीं की गई। बीएसए लालचंद ने बताया कि दो बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट छूट गई थी, सोमवार तक जांच कर समिति को भेज दी जाएगी।
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शिकायतकर्ता सुखनंदन निषाद का कहना है कि उनकी भांजी का एडमिशन तो स्कूल ने ले लिया, लेकिन उसके बाद लगातार परेशान किया जा रहा है। उनके मुताबिक, उनसे बार-बार पिता का आधार मांगा जा रहा है, जबकि बच्ची के पिता जेल में हैं और उसकी मां की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। हर छोटी बात के लिए स्कूल के चक्कर लगवाए जाते हैं। किताब और ड्रेस भी अपनी मर्जी की दुकान से लेने का दबाव बनाया जाता है। जानकारी मांगने पर सही जवाब नहीं मिलता, बल्कि उल्टा व्यवहार किया जाता है, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं। इसके अलावा किताबें जमा करने के दौरान भी विरोधाभासी रवैया अपनाया गया। व्हाट्सएप संदेश के जरिये बाहर से तय दुकानों से किताब व ड्रेस खरीदने को कहा गया।
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