सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात करते नृपेंद्र मिश्र।
अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि आगामी 22 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति और विभिन्न समितियों व उपसमितियों के भविष्य को लेकर ट्रस्ट की ओर से अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात करते हएु नृपेंद्र मिश्र ने स्पष्ट किया कि यदि सीईओ की नियुक्ति होती है, तो वह ट्रस्ट की निगरानी में अपना स्टाफ नियुक्त करेगा और आगे की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था उसी के अनुसार संचालित होगी। ट्रस्ट में संभावित बदलावों के बारे में उन्होंने कहा कि वह छह जुलाई को हुए ट्रस्ट की बैठक में शामिल नहीं थे। 22 जुलाई की बैठक के बारे में कहा कि मुझे एजेंडा नहीं पता, अगर मामला निर्माण से जुड़ा होगा तो मैं रहूंगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि वे पदेन सदस्य हैं और ट्रस्ट के पदेन सदस्यों को मतदान करने का अधिकार नहीं होता है। हम जरूरी विषयों पर ही अपने विचार देते हैं। दर्शनार्थियों की संख्या में कमी आने की चर्चाओं को सिरे से खारिज करते हुए नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं की कोई कमी नहीं है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं से लगातार संवाद किया जा रहा है और इस दौरान किसी भी प्रकार की शिकायत या असंतोष की बात सामने नहीं आई है।
राम मंदिर निर्माण पर 1800 करोड़ खर्च होने का अनुमान
- दो दिवसीय समीक्षा बैठक के समापन पर नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर निर्माण और प्रस्तावित संग्रहालय से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राम मंदिर निर्माण की कुल लागत 1600 से 1800 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है। इसके साथ ही, राम कथा संग्रहालय के निर्माण पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है। इस संग्रहालय की सभी गैलरियों की स्क्रिप्ट फाइनल कर दी गई है।