अयोध्या। नगर निगम के कर विभाग के अधिकारियों और पार्षदों के बीच तनातनी हो गई। इसके चलते काफी देर तक हंगामेदार स्थिति बनी रही। महापौर के कक्ष में कर विभाग के अधिकारियों की ओर से खेद जताने के बाद विवाद शांत हुआ। इस मामले में नगर आयुक्त ने विभागीय अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी तलब किया है।
नगर निगम के कर विभाग के कार्यालय में बृहस्पतिवार को सुबह 11 बजे के करीब समाजवादी पार्टी पार्षद दल के नेता विशाल पाल और निर्दल पार्षद सूर्या तिवारी किसी काम से गए थे। इस दौरान मुख्य कर अधिकारी गजेंद्र पाल और जोनल अधिकारी सुभाष त्रिपाठी ने उन पर फाइलों के निस्तारण के लिए दबाव बनाने को लेकर टिप्पणी कर दी। इसी के बाद हंगामा शुरू हो गया। इन दोनों पार्षदों के पक्ष में सत्ता पक्ष और विपक्ष के 40 से अधिक पार्षद लामबंद हो गए।
महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी को जब इस बारे में जानकारी हुई तो उन्होंने पार्षदों को बुलाकर उनकी बात सुनी। इसके बाद कर विभाग के अधिकारियों को बुलाया। दूसरे चरण में महापौर के कक्ष में वार्ता के दौरान एक बार फिर माहौल गर्म हो गया। पार्षदों ने कहा कि यदि उन्होंने कर विभाग के अधिकारियों पर दबाव बनाकर कोई फाइल अनैतिक ढंग से निस्तारित करवाई है तो इसका साक्ष्य प्रस्तुत किया जाए। उनके खिलाफ विभाग मुकदमा भी दर्ज करा सकता है।
महापौर और नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार के हस्तक्षेप पर कर विभाग के अधिकरियों ने संबंधित पार्षदों से खेद जताया। इसके बाद विवाद किसी तरह शांत हुआ। इस दौरान महापौर और नगर आयुक्त ने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी पार्षदों का सम्मान सुनिश्चित करें। उनके वाजिब काम को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए। इस तरह के हालात किसी भी सूरत में दोबारा उत्पन्न नहीं होने चाहिए।