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Ayodhya News: 84 कोसी फोरलेन निर्माण ने पकड़ी रफ्तार

Sun, 08 Feb 2026 09:37 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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फोटो-07-84 कोसी फोरलेन परिक्रमा मार्ग का निर्माण- संवाद
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बीकापुर। अयोध्या धाम के प्रस्तावित 84 कोसी फोरलेन परिक्रमा मार्ग (एनएच 227 बी) का निर्माण कार्य तहसील क्षेत्र में रफ्तार पकड़ने लगा है। भूखंडों की निशानदेही के बाद कार्यदायी संस्था मिट्टी पटाई का कार्य करा रही है। गिट्टियां भी डाली जा रही हैं।
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जन सुविधा और यात्रा को सुगम बनाने के लिए ऊचगांव, अमौनी, तोरोमाफी, नगर पंचायत बीकापुर, ओहरपुर सहित चिन्हित स्थानों पर अंडरपास और फ्लाईओवर निर्माण का कार्य शुरू किया गया है। सुविधानुसार मार्ग को डायवर्ट किया जा रहा है। क्षेत्र के पं. बिंदेश्वरी पांडेय, बुद्धू पांडेय, प्रधान शारदा वर्मा, सुरेश पांडेय, बृजेश पाठक, शिवकुमार कनौजिया आदि का कहना है कि इससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। 275 किलोमीटर लंबे 84 कोसी परिक्रमा मार्ग अयोध्या, गोंडा, बस्ती, बाराबंकी, अंबेडकर नगर कुल पांच जिलों से गुजरेगा जिसमें सर्वे के दौरान 2806 भूखंड शामिल किए गए हैं। परिक्रमा मार्ग निर्माण के लिए 45 मी चौड़ाई में निशानदेही की गई है । यहां मकान और दुकानों को भी हटाया जा रहा है।
पौराणिक स्थलों के कायाकल्प होने की उम्मीद
भगवान राम के वन गमन स्थलों से संबंधित करीब एक दर्जन स्थल बीकापुर तहसील क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर स्थित है। श्री राम संस्कृति शोध संस्थान ने देश के कई राज्यों में खोज किए गए 290 भगवान राम की यात्रा से संबंधित स्थलों में इनका भी उल्लेख है जो 84 कोसी परिक्रमा की परिधि में आते हैं। स्थलों में सूर्यकुंड रामपुर भगन, तोरो माफी में स्थित सीता कुंड, राम कुंड, सुग्रीव कुंड और दुग्धेश्वर कुंड, उमरनी पिपरी में स्थित हनुमान कुंड एवं विभीषण कुंड सहित अन्य कई जद में आ रहे हैं। सूर्यकुंड और सीता कुंड 84 कोसी परिक्रमा का छठा और सातवां पड़ाव स्थल भी है।
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तीन धार्मिक कुंडों के अस्तित्व पर संकट
पौराणिक स्थलों में तीन धार्मिक कुंडों को क्षति भी पहुंची है। तोरोमाफी स्थित सुग्रीव कुंड के ऊपर से फोरलेन गुजर रहा है। यहां स्थापित प्राचीन माइलस्टोन और श्रीराम चरण चिह्न सड़क के बीच में आ रहा है। उमरनी पिपरी में हनुमान कुंड और विभीषण कुंड की काफी गहराई तक खुदाई करके परिक्रमा मार्ग पर पटाई करने के लिए मिट्टी निकाली गई है। जिससे कुंड की भौगोलिक और आकृति अपने मूल स्वरूप से बदल गई है।
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