केस एक : गोंडा जिले के रामपुर भगाही निवासी मोहित कुमार शुक्ला ने 20 फरवरी, 2023 को अपनी पत्नी शुभी को देवांश हॉस्पिटल में भर्ती कराया। वहां उनका ऑपरेशन हुआ और 83,467 रुपये वसूले गए। पीड़ित ने इलाज में लापरवाही व जबरन वसूली समेत कई आरोप लगाए, जिनकी जांच भी हुई।
केस दो : कोतवाली अयोध्या क्षेत्र के हनुमानगढ़ी चौराहा निवासी बृजेश कुमार ने 12 मई को अपनी पत्नी मयूरी को एक दलाल के माध्यम से देवांश हॉस्पिटल ले गए। वहां उन्हें सामान्य प्रसव के लिए आश्वस्त करके बाद में इमरजेंसी बताकर सिजेरियन प्रसव कर दिया। इस बीच नवजात की हालत भी नाजुक हो गई, जिसे आईसीयू में रखवाया गया। 19 अगस्त को पीड़ित ने शिकायत की, जिसकी भी जांच हुई।
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अयोध्या। इसी तरह देवांश हॉस्पिटल के अनियमितताओं की पिछले साल भर से शिकायतें होती रहीं। अस्पताल प्रबंधन अकुशल चिकित्सकों के सहारे लगातार भोले-भाले मरीजों की जान से खेलता रहा, लेकिन स्वास्थ्य महकमा निद्रा से नहीं जाग सका। जांच के नाम पर खानापूर्ति होती रही और सांठगांठ करके मामले रफा-दफा होते रहे। लोगों का मानना है कि यदि उसी समय मामले की सही ढंग से जांच हो जाती तो शायद किसी दूसरे मरीज की जान गलत इलाज से न जाती।
जिला महिला अस्पताल से मरीजों को बरगलाते हैं दलाल
देवांश हॉस्पिटल में जो मामले सामने आए हैं, इनमें अधिकांश मरीजों को जिला महिला अस्पताल में मौजूद दलालों ने बरगलाकर वहां तक पहुंचाया है। इस गोरखधंधे में अस्पताल के कुछ कर्मचारी, अस्पतालों में घूमने वाले निजी एंबुलेंस चालक, आशा बहुओं आदि का भी हाथ रहता है।
पूर्व में हुई जांचों पर उठ रहे सवाल
देवांश हॉस्पिटल की इसके पहले भी तीन जांच हो चुकी है, लेकिन जांच करने वाले अधिकारी ने अस्पताल में इंपैनल चिकित्सकों का विवरण शायद नहीं देखा। जबकि, सभी मामले सिजेरियन प्रसव से ही संबंधित थे। ऐसे में जांच टीम की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है।
-इसके पहले के अधिकांश मामले तो पूर्व के हैं, लेकिन ताजा मामले की जांच कराई तो अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह दोषी मिला है, इसलिए कार्रवाई जरूर होगी। -डॉ. संजय जैन, सीएमओ