अयोध्या। गोरक्षपीठ से जुड़े और सीएम योगी के गुरु भाई संत रामनाथ मिश्र तमाम मुश्किलों व कट्टरपंथियों से जूझते हुए पाकिस्तान में धर्म ध्वजा लहरा रहे हैं। वे पाकिस्तान में कराची के प्राचीन पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत हैं। उन्होंने अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। रामलला को भोग अर्पित किया। मंदिर परिसर में स्तुति की। अयोध्या के रामाश्रम में अमर उजाला से बात करते हुए उन्होंने पाकिस्तानी हिंदुओं के संघर्षाें की जानकारी दी।
बताया कि बंटवारे के बाद इनका परिवार कराची में ही रह रहा है। 1500 सालों से इनकी पीढ़ी त्रेतायुगीन पंचमुखी हनुमान मंदिर में सेवा दे रही है। उसी पीढ़ी के महंत रामनाथ बताते हैं कि मान्यता है कि प्रभु श्रीराम वनवास से लौटते समय पंचमुखी हनुमान मंदिर आए थे। पूजा-पाठ किया था। कहा कि पाकिस्तान में पांच बड़े मंदिर हैं जिनमें से पंचमुखी हनुमान मंदिर एक है। 2001 में जब वह मंदिर के महंत बने तो मंदिर की जमीनों पर हुए अवैध कब्जों को खाली कराने के लिए संघर्ष किया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जमीनों को कब्जा मुक्त कराने में सफलता मिली। आज मंदिर परिसर 300 स्क्वायर मीटर से 2609 स्क्वायर मीटर के दायरे में हो गया है।
महंत रामनाथ खुद भी कट्टरपंथियों के हमले के शिकार हुए, जान जाते-जाते बची, लेकिन डिगे नहीं, सनातन के संरक्षण व संवर्धन का कार्य जारी रखा। बताया कि पाकिस्तान में मंदिरों को आए दिन निशाना बनाया जाता है। पाकिस्तान में दो फीसदी हिंदू हैं, लेकिन उनकी संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है। हिंदुओं को हर काम के लिए संघर्ष करना पड़ता है। कहा कि हिंदुस्तान में घटित होने वाली घटना का असर पाकिस्तान में रहता है।
महंत रामनाथ ने बताया कि पाकिस्तान की सरकार हिंदुओं को उत्सव, त्योहार मनाने से नहीं रोकती है, बल्कि वह सहयोगी करती है, लेकिन कट्टरपंथी विरोध करते हैं। बहुत सारे हिंदू डर के माहौल की वजह से त्योहार खुलकर नहीं मना पाते। हालांकि पंचमुखी हनुमान मंदिर में हर साल हनुमान जयंती बड़े ही उल्लास से मनाई जाती है। क्षेत्र में भव्य रथयात्रा निकलती है, अनुष्ठान होते हैं। रामनवमी पर भी भव्य आयोजन उनके मंदिर की ओर से किया जाता है।
महंत रामनाथ ने बताया कि सरकार की ओर से उन्हें लखनऊ व हरिद्वार के लिए वीजा मिला था। वे चार फरवरी को लखनऊ पहुंचे थे। उन्होंने इससे पहले ही भारत सरकार को पत्र भेजकर अपने पुत्र के जनेऊ संस्कार व प्रयागराज कुंभ में स्नान की इजाजत मांगी थी। सरकार ने उन्हें भारत पहुंचने पर पांच स्थलों प्रयागराज, काशी, अयोध्या, गोरखपुर व मथुरा के लिए ई-वीजा उपलब्ध कराया। बताया कि वह अपने साथ 400 पाकिस्तानी हिंदुओं की अस्थियां भी लाए हैं। 22 को हरिद्वार में दूध की धारा में अस्थियां विसर्जित करेंगे। पुत्र का जनेऊ संस्कार प्रयागराज में करा दिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ से पुत्र को दीक्षा भी दिलाएंगे।