अयोध्या। रायगंज स्थित दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के बीच शुक्रवार को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का आगमन जैन समाज के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। मुख्यमंत्री महोत्सव में शामिल होने के साथ ही 923 जिन पुत्रों को समर्पित भव्य मंदिर का शिलान्यास करेंगे। इसके अलावा भगवान आदिनाथ मंदिर के मुख्य द्वार का भी लोकार्पण करेंगे तथा जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती से भेंट करेंगे।
मुख्यमंत्री के आगमन से पूर्व बृहस्पतिवार को पंचकल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन भगवान मुनिसुब्रतनाथ का जन्मकल्याणक अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह जैसे ही गणिनी प्रमुख ज्ञानमती ने प्रभु के अवतरण की मंगल उद्घोषणा की, पूरा पंडाल जयघोष और वाद्य यंत्रों की गूंज से भर उठा। श्रद्धालुओं ने इस क्षण को दिव्य उत्सव के रूप में मनाया। धार्मिक अनुष्ठानों के क्रम में भगवान मुनिसुब्रतनाथ की प्रतिमा को गर्भगृह से बाहर लाकर सौधर्म इंद्र को समर्पित किया गया। इसके बाद मंदिर परिसर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। ऐरावत हाथी पर विराजमान भगवान की प्रतिमा के साथ निकली यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई तुलसी उद्यान तक पहुंची और पुनः मंदिर लौटी।
इस अवसर पर आचार्य भद्रबाहु एवं गणिनी प्रमुख ने भगवान मुनिसुब्रतनाथ के जन्मकल्याणक की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि तीर्थंकरों का जीवन मानवता को संयम, अहिंसा और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाता है। कर्नाटक की जैन महिला मंडल द्वारा प्रस्तुत भावनृत्य और नाटिकाओं ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने बताया कि मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर तैयारी पूरी हो चुकी है। महोत्सव में अवध सहित उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, मणिपुर और देश के अन्य राज्यों से करीब दो हजार श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे हैं। संचालन डॉक्टर जीवन प्रकाश जैन ने किया। कार्यक्रम में महामंत्री अमरचंद जैन, ऋषभ जैन, लल्ला जैन, मनोज जैन, पंकज जैन, योगेश जैन, नमन जैन आदि मौजूद रहे।
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पांडुक शिला पर हुआ भगवान का जन्माभिषेक
मंदिर पहुंचने पर भगवान को पांडुक शिला पर विराजमान कर जन्माभिषेक किया गया। संपूर्ण पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन के निर्देशन में विधि-विधान से संपन्न हो रहा है। शाम को पूजा-विधान के साथ भगवान का पालना झुलाया गया तथा बाल क्रीड़ा की मनोहारी झांकी प्रस्तुत की गई। बच्चों ने भगवान के साथ क्रीड़ा के प्रतीकात्मक दृश्य में भाग लेकर धार्मिक संस्कारों से जुड़ने का अवसर प्राप्त किया।