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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: सोने से मढ़ी रामचरितमानस गायब होने का दावा, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव ने लगाए गंभीर आरोप

Sat, 04 Jul 2026 08:53 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या

सार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बीच अब सोने से मढ़ी रामचरितमानस गायब होने का दावा किया गया है। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पांच करोड़ की रामचरितमानस ट्रस्ट को सौंपी थी। अब तक रसीद नहीं मिली। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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रामनगरी अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बीच पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एवं पूर्व आईएएस अधिकारी लक्ष्मी नारायण ने राम मंदिर ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक चैनल को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने दावा किया है कि अप्रैल 2024 में ट्रस्ट को करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य की सोने की मढ़ी रामचरितमानस भेंट की थी, लेकिन उसकी अब तक रसीद नहीं दी गई। उनका आरोप है कि कुछ महीने बाद वह रामचरितमानस मंदिर परिसर से गायब हो गई।
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लक्ष्मी नारायण के अनुसार उन्होंने आठ अप्रैल 2024 को लगभग सवा क्विंटल वजन की विशेष रामचरितमानस श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपी थी। इस ग्रंथ के करीब 1000 पन्नों पर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ी हुई थी। उनका दावा है कि इसकी अनुमानित कीमत करीब पांच करोड़ रुपये थी। 

रामचरितमानस को मंदिर में सुरक्षित रखा जाए

उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या पहुंचने पर उन्हें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मिलने के लिए करीब नौ घंटे इंतजार करना पड़ा। उन्होंने हाथ जोड़कर अनुरोध किया कि उनकी जीवनभर की पूंजी से तैयार कराई गई रामचरितमानस को मंदिर में सुरक्षित रखा जाए। आरोप है कि इस पर उन्हें जवाब मिला कि ट्रस्ट के पास अनेक लोगों के आभूषण और अन्य भेंट आती हैं और सभी का प्रदर्शन संभव नहीं है।

चंपत राय से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला

पूर्व आईएएस अधिकारी का कहना है कि तीन-चार महीने बाद जब उन्होंने रामचरितमानस के बारे में जानकारी ली तो वह मंदिर में नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा और ट्रस्ट सदस्य गोपाल राव से भी संपर्क किया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उनका आरोप है कि दोबारा अयोध्या जाकर चंपत राय से मिलने पर भी उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। लक्ष्मी नारायण ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उन्होंने इस मामले में एसआईटी को भी पत्र लिखा है।
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