अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण में पूर्व महासचिव चंपत राय का नाम आरोपियों की सूची के बजाय गवाहों में आने के बाद उनकी प्रकाशित पुस्तक ‘श्रीराम जन्मभूमि का इतिहास जस का तस’ भी चर्चा में है। 40 पेज की इस पुस्तक में राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक की यात्रा का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक की प्रतियां डाक के माध्यम से देशभर में भेजी जा रही हैं। अयोध्या में संत-महंतों और प्रमुख लोगों को भी इसकी प्रतियां भेंट की जा रही हैं।
चंपत राय लंबे समय तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव रहे हैं और मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में उनकी प्रमुख भूमिका रही है। ऐसे समय में जब चढ़ावे की रकम में कथित चोरी का मामला जांच के बाद अदालत की कार्यवाही तक पहुंच चुका है, उनकी पुस्तक को लेकर भी चर्चा हो रही है।
पुस्तक में राम जन्मभूमि आंदोलन के करीब 500 वर्षों के इतिहास से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख किया गया है। इसमें आंदोलन के संघर्ष, विभिन्न पड़ावों, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और इसके बाद मंदिर निर्माण की यात्रा को समेटने का प्रयास किया गया है। मंदिर निर्माण से जुड़े निर्णयों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका का भी उल्लेख है।
112 बिंदुओं में आंदोलन से निर्माण तक का सफर
40 पेज की पुस्तक में 112 बिंदुओं के माध्यम से राम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और मंदिर निर्माण तक की प्रमुख घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इसमें आंदोलन के विभिन्न पड़ावों, निर्णयों और मंदिर निर्माण से जुड़े प्रसंगों को शामिल किया गया है। पुस्तक की प्रतियां डाक के जरिये देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजी जा रही हैं। अयोध्या में संत-महंतों और आंदोलन से जुड़े लोगों को भी पुस्तक भेंट की जा रही है।