रामनगरी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से चंपत राय के इस्तीफे के साथ राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण से जुड़े एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन हो गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से लेकर विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष नेतृत्व और फिर राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव तक का उनका लगभग चार दशक का सफर संगठन, आंदोलन और मंदिर निर्माण की धुरी रहा। लेकिन, चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच के बीच उनका कार्यकाल विवादों की छाया में समाप्त हुआ।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में जन्मे चंपत राय ने रसायन विज्ञान के प्राध्यापक के रूप में अपने कॅरियर की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने अध्यापन छोड़कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक का दायित्व संभाला और स्वयं को पूरी तरह संगठनात्मक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया।
आंदोलन के घटनाक्रम पर उनकी गहरी पकड़ मानी जाती थी
इसके बाद वे विश्व हिंदू परिषद से जुड़े और अंतरराष्ट्रीय महामंत्री तथा केंद्रीय उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान वे रणनीति, न्यायालयी प्रक्रिया और जनसंपर्क अभियान के प्रमुख चेहरों में रहे। विवाद से जुड़े मुकदमों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और आंदोलन के घटनाक्रम पर उनकी गहरी पकड़ मानी जाती थी।