अयोध्या। राम मंदिर के प्रथम तल पर सिंहासन पर राजाराम को प्रतिष्ठित किया जा चुका है। मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा का क्रम शुरू हो गया है। प्रथम तल पर बने सिंहासन पर राम दरबार की मूर्तियों को स्थापित करने में कुछ तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। असल में राम दरबार की मूर्ति के आकार-प्रकार व सिंहासन के आकार-प्रकार में मामूली अंतर आ जाने से परेशानी उठानी पड़ी।
राम मंदिर के भूतल पर रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के 16 माह बाद राजाराम की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। राम मंदिर का प्रथम तल बनकर तैयार हो चुका है। ट्रस्ट सूत्रों की ओर से मिली जानकारी के अनुसार जब राम दरबार की मूर्ति को सिंहासन पर रखा जाने लगा तो सिंहासन की लंबाई छोटी पड़ गई। राम दरबार की मूर्ति का वजन काफी अधिक है इसलिए इसको आसन पर विराजमान करने में 72 घंटे से अधिक का समय लगा। क्रेन के माध्यम से मूर्ति को लिफ्ट कर प्रथम तल पर पहुंचाया गया। इस काम में काफी सावधानी बरती गई। इसमें रोजाना छह लोग लगे,तब जाकर मूर्ति को आसन पर विराजमान किया जा सका।
बताया गया कि सिंहासन दो परत में बनाया गया है। नीचे की परत तो ठीक थी लेकिन ऊपर की परत की लंबाई कुछ कम हो गई थी, जिसके चलते मूर्ति को आसन पर विराजमान करने में दिक्कत आ रही थी। एक दिन तो मूर्ति को मंदिर के प्रथम तल पर रखा गया था, फिर मूर्ति के आसन की दूसरे परत की लंबाई बढ़ाई गई। उसके बाद मूर्ति को विराजमान किया जा सका। मूर्तियों को मजबूती से सिंहासन पर बैठाने के लिए दो-दो इंच की गहराई भी कराई गई ताकि मूर्ति मजबूती से सिंहासन पर स्थापित हो सके। राम दरबार की मूर्ति में सीता राम की मूर्ति एक पत्थर में है। जबकि भरत, लक्ष्मण, शत्रुधन व हनुमान जी की मूर्ति अलग पत्थर में बनी है।