26- तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ व चंद्र प्रभु के समक्ष रत्नवृष्टि करते श्रद्धालु- संगठन
अयोध्या। जैन मंदिर रायगंज में आठवें तीर्थंकर तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु और 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का जन्म कल्याणक भक्ति, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। भगवान चंद्रप्रभु व पार्श्वनाथ के समक्ष रत्नवृष्टि की गई और पालना झुलाया गया। मंदिर परिसर जयकारों और भक्ति गीतों से गूंज उठा। गणिनी प्रमुख ज्ञानमती के पावन सानिध्य व जैन मंदिर के पीठाधीश रवींद्र कीर्ति स्वामी के संयोजन में जन्म कल्याणक के अवसर पर अभिषेक, पूजन, आरती और मंगल पाठ का आयोजन हुआ। वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। मंदिर परिसर में स्थित पांडुशिला पर पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद 108 कलशों से जैन श्रद्धालुओं ने अभिषेक किया। अभिषेक करने का सौभाग्य लखनऊ के अध्यात्म व अर्पिता जैन को मिला। रवींद्र कीर्ति स्वामी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान पार्श्वनाथ का जीवन अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और करुणा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज के समय में भगवान पार्श्वनाथ के उपदेश मानवता के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही समाज में शांति, सद्भाव और नैतिकता की स्थापना संभव है।
उन्होंने कहा कि जन्म कल्याणक केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का अवसर है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में संयम, सहिष्णुता और अहिंसा को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में विश्व शांति और जनकल्याण की कामना के साथ सामूहिक प्रार्थना की गई। समस्त पूजन कार्यक्रम पंडित विजय कुमार जैन के निर्देशन में हुआ। इस अवसर पर डॉ. जीवन प्रकाश जैन, विनोद जैन, अनूप देवी जैन, राकेश जैन, सरोज जैन, सुनंदा दिवाकर, मुकेश जैन,काशमा जैन, मुन्नी बाई जैन सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।