अयोध्या। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय इन दिनों खुद को बेगाना सा महसूस कर रहा है। यहां के कई महत्वपूर्ण पद पहले से प्रभारियों के भरोसे चल रहे हैं। अब प्रशासनिक कामकाज में भी ठहराव सा आने लगा है। इसी का नतीजा है कि गुजरात मॉडल पर की जाने वाली शिक्षक कैबिनेट की बैठक पर ब्रेक लग गया है। प्रदेश की राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आंनदीबेन पटेल के विशेष निर्देश पर कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल इसे हर सप्ताह करती थीं।
पहले कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल के अपने पिता के इलाज के लिए लंबे अवकाश पर चले जाने से शिक्षक कैबिनेट की बैठक में ठहराव आया। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह को राजभवन की ओर से अवध विश्वविद्यालय का भी कार्यभार सौंपा गया। डॉ. सिंह ने प्रभारी कुलपति के तौर पर कार्यभार संभालने के बाद अभी तक इस बैठक को फिर से शुरू करने की कोई पहल नहीं की है। ऐसे में विश्वविद्यालय के विकास और शैक्षणिक सुधार के निरंतर प्रयास के उद्देश्य से की गई राज्यपाल की इस पहल पर ग्रहण लग गया है।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सीधे मंच से कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल से मुखातिब होते हुए कहा था कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब वह वहां शिक्षा मंत्री थीं। उस वक्त मोदी हर सप्ताह बुधवार को कैबिनेट की बैठक करते थे। इसमें सभी मंत्री विभिन्न जिलों के दौरे के समय वहां सामने आई समस्याओं पर रिपोर्ट देते थे। इसमें कोई भी मंत्री किसी भी विभाग से जुड़ी समस्या बता सकता था। इसके आधार पर संबंधित मंत्री समाधान की पहल करता था। इसी तर्ज पर कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय में भी शिक्षक कैबिनेट गठित कर हर सप्ताह बैठक करने और सुझावों के आधार पर सुधार के निर्देश दिए थे।
कुलपति प्रो. गोयल ने तत्काल यह पहल करते हुए शिक्षक कैबिनेट गठित की और हर बुधवार को बैठक भी करती थीं। इस कैबिनेट में कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, अधिष्ठाता छात्र कल्याण समेत सभी संकाय प्रमुख शामिल किए गए थे। इस बारे में पूछे जाने पर कैबिनेट के एक सदस्य ने बताया कि पिछले चार बुधवार से यह बैठक नहीं हाे सकी है। हालांकि इसके पहले की बैठकों में किए गए कई निर्णयों पर अमल की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। कुछ फैसलों पर अभी आदेश जारी होने बाकी थे।