अयोध्या। जिले में अवैध पैथोलॉजी के साथ ही बिना पंजीकरण के जगह-जगह ब्लड कलेक्शन सेंटर भी खुले हैं। लंबे समय से यह केंद्र मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अब तक बेखबर रहा है। सीएमओ ने ऐसे केंद्रों पर छापा मारना शुरू किया तो संचालकों की कलई खुलने लगी है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग के अधीन महज 80 पैथोलॉजी पंजीकृत हैं। जबकि, हर चाक-चौराहे से लेकर गली-कूचे तक लगभग 200 की संख्या में पैथोलॉजी संचालित हैं। यह पैथोलॉजी तो अवैध रूप से चल ही रही हैं, इनके नीचे ब्लड कलेक्शन सेंटर के नाम पर भी खेल हो रहा है। शहर से लेकर देहात तक ऐसे केंद्रों की भरमार है। हैरत की बात है कि स्वास्थ्य विभाग में एक भी कलेक्शन सेंटर का पंजीकरण नहीं है। इस तरह जाहिर है कि सभी कलेक्शन सेंटर लंबे समय से जिले में अवैध रूप से संचालित हैं।
मरीजों को आधुनिक व बेहतर जांच का हवाला देकर यह केंद्र संचालक नमूने लेते हैं और उन्हें किसी पैथोलॉजी में भेजकर जांच कराते हैं। सही ढंग से रखरखाव न होने व परिवहन की दिक्कतों की वजह से कई बार नमूने खराब हो जाते हैं। लिहाजा मरीजों को उल्टी-सीधी जांच रिपोर्ट पकड़ाकर उनकी जान से खिलवाड़ किया जाता है। मरीज इसी रिपोर्ट पर भरोसा करके इलाज कराता है, जिसका उसे दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है।
हर अधीक्षक को करनी होती है निगरानी
अवैध रूप से संचालित इन केंद्रों की निगरानी ब्लॉक स्तर पर संचालित सीएचसी व उसके अधीन संचालित पीएचसी के अधीक्षकों को करनी होती है। जनपद स्तर पर झोलाछाप और अवैध केंद्रों के नोडल व तहसीलवार डिप्टी सीएमओ भी इसके लिए नामित हैं। इसके बावजूद जिले भर में कुकुरमुत्ते की तरह कलेक्शन सेंटर और पैथोलॉजी लैब संचालित हो रही हैं, लेकिन अब तक जिम्मेदारों ने कार्रवाई की जहमत नहीं उठाई। लाल पैथलैब में एसपी ग्रामीण बलवंत चौधरी को भ्रामक रिपोर्ट देने के बाद महकमा जागा तो अवैध केंद्रों का खुलासा हो रहा है।
सीएमओ डाॅ. सुशील कुमार बानियान ने बताया कि लाल पैथलैब जैसी लैब से इस तरह की भ्रामक रिपोर्ट देना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसलिए सभी केंद्रों का सत्यापन कराया जा रहा है। पैथोलॉजी लैब के अलावा अवैध रूप से संचालित ब्लड कलेक्शन सेंटरों की भी पड़ताल करवाकर कार्रवाई की जाएगी।