बीकापुर। उमरनी पिपरी चौराहे पर श्रीरामलीला समिति की ओर से चल रही 11 दिवसीय रामलीला के पांचवें दिन वनवास, श्रवण कुमार की कथा, राजा दशरथ के प्राण त्यागने और भरत-राम मिलन का भावपूर्ण मंचन किया गया। मंचन देख दर्शक भावुक हो गए।
मंचन में भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के चित्रकूट पहुंचने, ऋषि-मुनियों से भेंट और श्रवण कुमार की कथा के बाद राम वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने का प्रसंग दिखाया गया। इसके बाद भरत, शत्रुघ्न और अयोध्यावासी राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट पहुंचते हैं। भरत के आग्रह के बावजूद भगवान राम पिता के वचन का पालन करते हुए अयोध्या लौटने से इन्कार कर देते हैं। इस पर भरत उनकी चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटते हैं और नंदीग्राम स्थित भरत कुंड में पादुका रखकर वहीं निवास करने का संकल्प लेते हैं।
राजा दशरथ की भूमिका सम्राट कसौधन, राम की अनिल शर्मा, लक्ष्मण की मिथुन और भरत की राकेश वर्मा ने निभाई। समिति के प्रबंधक राकेश वर्मा, अध्यक्ष विजय वर्मा और संचालक धनपाल पटेल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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सीता हरण का मंचन देख भावुक हुए दर्शक
कस्बा बीकापुर के आजाद नगर मोहल्ले में चल रही रामलीला में रविवार रात जानकी घाट बड़ा स्थान, अयोध्या के बाल कलाकारों ने सीता हरण का मंचन किया। शूर्पणखा के अपमान और खर-दूषण के वध का बदला लेने के लिए रावण मामा मारीच की सहायता से साधु का वेश धारण कर राम की कुटिया तक पहुंचता है। छल से सीता का हरण कर वह उन्हें लंका ले जाने लगता है।
रास्ते में गिद्धराज जटायु रावण का विरोध करते हैं और सीता को बचाने का प्रयास करते हैं। रावण उनके पंख काटकर उन्हें घायल कर देता है और सीता को लेकर लंका चला जाता है। मंचन के दौरान रामलीला समिति के अध्यक्ष एवं प्रबंधक बाबा नवनीत चैतन्य, संतोष गुप्ता, संजय गौड़, मनोज पांडे, बृजेश पटवा, बरसाती यादव और नंद कुमार पांडे सहित बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।