अयोध्या। परिवहन विभाग में एमएसटी घोटाले के मामले में आरोपी ओम प्रकाश ओझा को अदालत ने जमानत देने से इन्कार कर दिया। यह आदेश विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट रजत वर्मा ने जमानत का कोई पर्याप्त आधार न पाते हुए पारित किया है।
अभियोजन के अनुसार परिवहन विभाग में प्रेम शंकर व गोपाल यादव निगम कर्मचारी के तौर पर कार्यरत थे जिन्हें बस के मासिक किराया (एमएसटी) का टिकट जारी करने का काम सौंपा गया था। मासिक किराया की धनराशि को परिवहन निगम में नहीं जमा किया गया। एक जनवरी 2016 से 30 अप्रैल 2018 के बीच एमएसटी का पैसा निगम में नहीं जमा किया गया, जिसकी जांच में 561596 रुपये का गबन पाया गया। गबन की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद विवेचना के दौरान ओम प्रकाश ओझा का नाम प्रकाश में आया। आरोपी ओम प्रकाश ओझा ने अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि वह निर्दोष है। न्यायाधीश ने पत्रावली पर मौजूद सबूत व तथ्यों के आधार पर आरोपी को जमानत देने से इन्कार कर दिया।