अयोध्या। फर्जी जमानत के कागजात को तहसील व थाने की मुहर लगाकर सत्यापित करने के मामले में आरोपी रवींद्र पाल की जमानत अर्जी कोर्ट ने निरस्त कर दी। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय दीपक यादव ने बुधवार को पारित किया है।
बस्ती निवासी आरोपी रविंद्र पाल ने जमानत अर्जी दाखिल करते हुए कहा कि वह हृदय रोगी है। गोंडा में पारिवारिक समारोह में शामिल होने गए थे, वहीं से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।वह खेती के काम में मजदूरी करता है। वादी मुकदमा श्याम नारायण शुक्ला ने प्रधानी के चुनाव की रंजिश के कारण उसे फर्जी फंसाया है। जमानत अर्जी का विरोध करते हुए एडीजीसी फौजदारी ने तर्क दिया कि आरोपी के पास से तहसील व थाने की फर्जी मुहर व कागजात बरामद हुए हैं।
आरोपी अपने साथियों भीम प्रकाश व शंभूनाथ के साथ मिलकर पेशेवर जमानतदारों के कागजात को फर्जी हस्ताक्षर व मुहर से सत्यापन कराने का कार्य किया है। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार राजा मान सिंह के साथ मुकदमों में सह आरोपी उपदेश यादव उर्फ बंटी की जमानत के लिए कूट रचित कागजात दाखिल किए गए थे। अदालत से सत्यापन कराने पर मामला उजागर हुआ।
बस्ती जिले के गोयरी पोखरनी निवासी श्याम नारायण शुक्ला की ओर से पूराकलंदर में उपदेश यादव व उसके परिवार वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। प्राथमिकी में कहा गया कि श्याम नारायण ग्राम प्रधान रहे हैं और वर्तमान में उनकी बेटी प्रधान है। ग्राम पंचायत के जसईपुर गांव निवासी अनिल कुमार का कागज उपदेश यादव के जमानत में लगाया गया है।इस पर ग्राम प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर व मुहर हैं।