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Ayodhya: अक्षय तृतीया पर भक्ति, उल्लास और श्रद्धा से सराबोर नजर आई अयोध्या, रामलला को अर्पित किए गए 56 भोग

Mon, 20 Apr 2026 07:34 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या

सार

अक्षय तृतीया पर रामलला का विशेष शृंगार व पंचामृत अभिषेक हुआ। इस अवसर पर पूरी रामनगरी भक्तिमय नजर आई। इसके साथ ही प्रभु को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया।
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रामलला ने पहनी आकर्षक पोशाक। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सनातन परंपरा के अत्यंत शुभ पर्व अक्षय तृतीया पर रामनगरी भक्ति, उल्लास और श्रद्धा से सराबोर नजर आई। उदया तिथि की मान्यता के चलते शहर के प्रमुख मठ-मंदिरों में अक्षय तृतीया का पर्व सोमवार को मनाया गया। राम मंदिर में विराजमान रामलला का इस अवसर पर विशेष शृंगार किया गया। इसके साथ ही प्रभु को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया।

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राम मंदिर में अक्षय तृतीया पर रामलला को सोने का मुकुट धारण कराया गया। दोपहर में उन्हें विविध पकवानों, फल, मिष्ठान, शरबत, जूस, लस्सी, सत्त्तू का शरबत आदि अर्पित किया। इससे पहले रामलला का पंचामृत अभिषेक भी किया गया। वहीं पौराणिक पीठ नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने बताया कि शुभ मुहूर्त में हनुमंतलला का भव्य शृंगार किया गया और लड्डुओं का भोग लगाया गया। यहां सुंदरकांड पाठ का आयोजन भी हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। विद्याकुंड स्थित वीर भगवान मंदिर में सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ। पंडित कौशल्यानंदन ने बताया कि पाठ के उपरांत श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

वहीं परिक्रमा मार्ग स्थित दुर्गा काली दरबार में महंत सूर्यानंद के सानिध्य में मां अन्नपूर्णा की भव्य झांकी सजाई गई, जिसने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। इस अवसर पर मां को विशेष भोग अर्पित किया गया। सुंदरकांड का पाठ व अन्य अनुष्ठान हुआ। इसी तरह रामनगरी के अन्य मंदिरों में आयोजन हुए।
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साकेत भवन में राष्ट्र कल्याण व विश्व शांति का संकल्प
अयोध्या। साकेत भवन मंदिर में अक्षय तृतीया के पुण्य अवसर पर आचार्य प्रवीण शर्मा के संयोजन में विशेष वैदिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। राष्ट्र कल्याण और विश्व शांति की कामना से 11 वैदिक आचार्यों ने श्री सूक्त, पुरुष सूक्त और श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ किया। आचार्य प्रवीण शर्मा ने कहा कि अक्षय तृतीया केवल शुभ तिथि नहीं, बल्कि सत्कर्म, दान, धर्म और लोकमंगल का संदेश देने वाला पर्व है। इस दिन किया गया जप, तप, दान और पूजा अक्षय फल प्रदान करती है। यदि समाज धर्म, सेवा और सद्भाव के मार्ग पर चले तो राष्ट्र और विश्व दोनों में शांति स्थापित हो सकती है।

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