समारोह की कमान इस बार पूरी तरह से विश्व हिंदू परिषद के हाथ में होगी जबकि प्राण प्रतिष्ठा समारोह में संघ ने कमान संभाली थी। विहिप इस बार न केवल आयोजन की व्यवस्थाओं को संभालेगी, बल्कि सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, साधु-संतों की भागीदारी, धार्मिक अनुष्ठानों और अतिथियों के समन्वय से लेकर कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा तय कर रही है। विहिप की यह सक्रिय भूमिका आयोजन में एक नई ऊर्जा और संगठित रूप देगी। विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि हिंदू समाज की एकजुटता, सेवा भावना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनेगा। इसके लिए देश भर से विहिप के करीब पांच सौ कार्यकर्ता बुलाए जाएंगे।