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अयोध्या: संसद जैसी होगी राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, चारों ओर बनने शुरू हुई 3400 मीटर लंबी दीवार

Tue, 09 Sep 2025 08:28 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला संवाद, अयोध्या

सार

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर की सुरक्षा मंदिर की तर्ज पर होगी। इसके लिए मंदिर परिसर के चारों ओर 3400 मीटर लंबी दीवार का निर्माण शुरू हो गया है। 
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अयोध्या राम मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
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 संसद भवन की तर्ज पर राम मंदिर की सुरक्षा दीवार का निर्माण शुरू हो गया है। इस दीवार के निर्माण के लिए संसद भवन का भ्रमण श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की एक टीम ने किया था। सुरक्षा दीवार 3400 मीटर लंबी होगी। एक साल के भीतर इसका निर्माण पूरा हो जाने की संभावना है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की बैठक मंगलवार को मणिरामदास की छावनी में हुई। 
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बैठक के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि रामकथा संग्रहालय में अभी सिविल वर्क चल रहा है। इसके बाद डिस्प्ले वर्क का काम शुरू होगा। संग्रहालय में 20 गैलरी होगी। इसमें एक हिस्से का निर्माण आईआईटी मद्रास की टीम 7डी तकनीक से कर रही है। संग्रहालय में रामायण की जितनी भी मूल प्रतियां हैं, वह सब उपलब्ध रहेंगी। ट्रस्ट महासचिव ने बताया कि नवंबर में होने वाले ध्वजारोहण समारोह की तिथि 25 नवंबर फाइनल कर दी गई है। 

हरदोई के कृष्ण मोहन बने राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र न्यास के नए ट्रस्टी
 श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास में पूर्व आईएफएस अधिकारी कृष्ण मोहन को नया ट्रस्टी मनोनीत किया गया है। यह नियुक्ति राम मंदिर के ट्रस्टी रहे कामेश्वर चौपाल के स्थान पर हुई है, जिनका फरवरी 2025 में निधन हो गया था।बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन से रिक्त पद पर भी नए ट्रस्टी के चयन पर विचार किया जा रहा है।
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श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव चंपत राय ने मंगलवार को बताया कि अनुसूचित समाज के कामेश्वर चौपाल के निधन से रिक्त हुए पद पर कृष्ण मोहन को राम मंदिर ट्रस्ट का नया ट्रस्टी मनोनीत किया गया है। वह भी अनुसूचित समाज से ही हैं। कृष्ण मोहन हरदोई के रहने वाले हैं। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से 70 के दशक में एमएससी की पढ़ाई पूरी की थी। एटॉमिक एनर्जी के क्षेत्र में पांच साल काम किया है। महाराष्ट्र कैडर में उनका चयन भारतीय वन सेवा (आईएफएस) में हुआ था। 2012 में वह सेवानिवृत हुए। इसके बाद से समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहे। चंपत राय के अनुसार सर्वसम्मति से कृष्ण मोहन के नाम पर सहमति बनी है।
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