रामनगरी अयोध्या में सावन झूलनोत्सव के बाद अब श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार जन्माष्टमी राम जन्मभूमि परिसर के लिए खास होने जा रही है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर पहली बार राम मंदिर में श्रीमद्भागवत का परायण होगा। चार सितम्बर की मध्यरात्रि जब घड़ी की सुई 12 बजेगी, तब कान्हा के जन्म की मंगल ध्वनि रामलला के आंगन में भी गूंजेगी। इस अवसर पर राम मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाएगा और रामलला को विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।
राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था के प्रमुख आचार्य इंद्रदेव मिश्र ने बताया कि जन्माष्टमी के लिए राम जन्मभूमि परिसर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। पूरे मंदिर परिसर की अलौकिक सजावट के साथ भव्य लाइटिंग की जाएगी। गर्भगृह में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अनुरूप आकर्षक झांकी सजाई जाएगी। जन्मोत्सव के अवसर पर रामलला का 50 किलो पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद उन्हें करीब डेढ़ क्विंटल पंजीरी का भोग लगाया जाएगा। साथ ही 56 भोग भी अर्पित किए जाएंगे। प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।
आचार्य इंद्रदेव के अनुसार राम जन्मभूमि परिसर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर इस बार विशेष धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। इसी क्रम में पहली बार श्रीमद्भागवत का परायण किया जाएगा। जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाए जाने के साथ मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान होंगे। रामलला के मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां भी उसी भव्यता और श्रद्धा के साथ की जा रही हैं, जिस तरह अन्य प्रमुख पर्वों का आयोजन होता है।
रामनगरी के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में भी जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। गोकुल भवन, बृजमोहन कुंज, राधा बृजराज मंदिर, राज सदन स्थित राधा माधव मंदिर, गुरुधाम और इस्कॉन मंदिर में उत्सव की तैयारियां चल रही हैं। इन मंदिरों में दो सितम्बर से ही धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ हो जाएगा।
जन्मोत्सव के बाद छठ्योत्सव की भी परंपरा
- अयोध्या के कई मंदिरों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के बाद छठ्योत्सव मनाने की भी परंपरा है। चुनिंदा मंदिरों में बृजमोहन कुंज भी शामिल है, जहां जन्मोत्सव के बाद भगवान श्रीकृष्ण के छठी उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस तरह जन्माष्टमी से लेकर छठ्योत्सव तक रामनगरी में कई दिनों तक कृष्ण भक्ति और धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रहेगी।