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राम मंदिर चढ़ावा चोरी : चंपत राय पर एफआईआर की अर्जी पर फिर टली सुनवाई, 16 अक्तूबर को अगली तारीख

Mon, 12 Oct 2026 04:03 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या

सार

अयोध्या में चढ़ावा चोरी के मामले में थाना रामजन्मभूमि पुलिस की ओर से अदालत में आख्या दाखिल नहीं की गई। इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीयूष त्रिपाठी ने सुनवाई के लिए 16 अक्तूबर की तारीख नियत की है।
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चंपत राय व अनिल मिश्रा।
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विस्तार
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राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग पर सोमवार को भी अदालत में सुनवाई नहीं हो सकी। रामजन्मभूमि थाना पुलिस की ओर से आख्या दाखिल नहीं किए जाने के कारण मामले में आगे की कार्यवाही नहीं बढ़ सकी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीयूष त्रिपाठी ने सुनवाई के लिए अब 16 अक्तूबर की तारीख नियत की है।

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पुलिस की आख्या का इंतजार बढ़ने के साथ ही मामले में अदालत की अगली कार्यवाही पर नजरें टिकी हैं। अधिवक्ता संघ के महामंत्री शैलेंद्र जायसवाल ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी दाखिल कर राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव, कृष्ण मोहन समेत अन्य अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है।

अर्जी पर सुनवाई के लिए अदालत ने पुलिस से आख्या मांगी थी, लेकिन सोमवार को निर्धारित तारीख पर भी रिपोर्ट दाखिल नहीं हो सकी। इसके चलते अदालत अर्जी पर आगे विचार नहीं कर सकी। सीजेएम अदालत की ओर से अगली तारीख नियत किए जाने के बाद अब पुलिस की आख्या और उस पर होने वाली सुनवाई का इंतजार है। 16 अक्तूबर को पुलिस की रिपोर्ट दाखिल होने पर मामले में आगे की कार्यवाही का रास्ता साफ हो सकता है।
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प्रकरण में पुलिस की रिपोर्ट महत्वपूर्ण
प्रकरण में पुलिस की रिपोर्ट महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिये अर्जी में लगाए गए आरोपों और शिकायत से संबंधित तथ्यों पर पुलिस का पक्ष अदालत के सामने आएगा। चढ़ावा प्रकरण राम मंदिर की व्यवस्थाओं और दानराशि से जुड़े मुद्दों के कारण पहले से ही चर्चा में रहा है। ऐसे में ट्रस्ट के पदाधिकारियों समेत अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली इस अर्जी पर अदालत की कार्यवाही को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अभी अदालत ने अर्जी में लगाए गए आरोपों पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है और न ही प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश पारित किया है।

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