अयोध्या। उदासीन आश्रम रानोपाली में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की खुशी में बृहस्पतिवार से अनुष्ठानों का शुभारंभ हो गया है। प्रख्यात कथाव्यास पुंडरीक गोस्वामी ने श्रीमद्भागवत कथा का प्रवचन करते हुए कहा कि सदियों से अयोध्या विश्व का मार्गदर्शन करती रही है। रामलला भव्य राममंदिर में बालक राम के रूप में विराज गए हैं।
उन्होंने कहा कि जब प्रभु के मंदिर का भूमिपूजन किया था तब भी कथा कहने का सौभाग्य मिला था। अब प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी यह सौभाग्य मिल रहा है। यह कथा रामलला के अभिनंदन में हो रही है। कहा कि व्यथा से मुक्त होना है तो भागवत की कथा जरूर सुनें। भगवान व्यास ने भागवत से आध्यात्म का दीप जलाया है। इस कथा के वक्ता भी भगवान और श्रोता भी भगवान हैं। भागवत कथा श्रवण करने और भगवान की शरण में जाने से जीवन धन्य हो जाता है। कथा जीव को दिव्यजीवी बनाती है। भगवान ने एक तरफ पलड़े पर भागवत कथा और दूसरे पलड़े पर सारी सुविधाएं रखीं लेकिन, भागवत का पलड़ा भारी हो गया।
इससे पहले कथा का शुभारंभ श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि व महंत डॉ़ भरत दास ने व्यासपीठ का पूजन कर किया। कथाव्यास पुंडरीक गोस्वामी ने ब्रज की रज देकर गोविंददेव गिरि का सम्मान किया। उद्घाटन के अवसर पर एडीजी जोन पीयूष मोर्डिया, मंडलायुक्त गौरव दयाल, आईजी प्रवीण कुमार,एसएसपी राजकुमार नैयर, पुजारी राजूदास, संत माधवानंद, संत एमबीदास समेत अन्य मौजूद रहे।