अयोध्या। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी (कान, नाक, गला) विभाग में पिछले छह माह से अधिक समय से ऑडियोमेट्री जांच ठप है। इससे मरीजों को सुनने की क्षमता की जांच के लिए भटकना पड़ रहा है। लंबे समय से व्याप्त इस समस्या से जूझ रहे रोगियों का दर्द जिम्मेदार नहीं सुन रहे हैं।
हमारी टीम ने सरकारी अस्पताल में मौजूद संसाधनों की हकीकत जानने के लिए ''मशीन बंद, रोगी परेशान' अभियान चलाया है। मेडिकल कॉलेज की पड़ताल में बेहतर इलाज के दावों की कलई खुल रही है। मंगलवार को ईएनटी विभाग का जायजा लिया गया तो यहां ऑडियोमेट्री जांच ठप मिली। इसके पीछे मशीन के किसी भाग में खराबी की वजह बताई गई। जबकि, ओपीडी मरीजों से खचाखच भरा था। इनमें कई मरीजों को ऑडियोमेट्री जांच की जरूरत बताई गई, लेकिन अस्पताल में सुविधा न मिलने से उन्हें निजी केंद्रों का रुख करना पड़ा।
इसलिए होती है ऑडियोमेट्री जांच
ऑडियोमेट्री जांच कान की सुनने की क्षमता मापने के लिए की जाती है। इससे पता चलता है कि व्यक्ति को कितनी मात्रा में सुनाई दे रहा है और सुनने में कमी किस स्तर की है। इसके अलावा कान में लगातार आवाज (टिनिटस) आने, चक्कर या संतुलन की समस्या, बच्चों में सुनने की क्षमता जांचने, कान के ऑपरेशन से पहले या बाद में, शोरगुल वाले कार्यस्थल पर काम करने वालों आदि की ऑडियोमेट्री जांच कराई जाती है। इस प्रक्रिया में मरीज को हेडफोन लगाकर अलग-अलग तीव्रता और पिच की आवाज सुनाई जाती है।
मरीजों ने जताई नाराजगी
दर्शननगर निवासी मो. नदीम ने बताया कि बेटे की जांच के लिए लगभग चार बार आ चुके हैं। हर बार मशीन खराब होने का बहाना बताकर भेज दिया जाता है। अब बाहर से ही जांच कराना पड़ेगा। कटरा के लोलपुर निवासी भरत यादव ने बताया कि बेटी को सुनने में दिक्कत है। पता चला कि यहां इसकी जांच होती है। इसलिए दो बार से आते हैं। बाहर इसके लिए 1000 रुपये मांगे जा रहे हैं। वहीं से जांच करानी पड़ेगी।
वर्जन...
ट्रॉमा सेंटर समेत अस्पताल का निरीक्षण किया है। सभी जांचों से संबंधित विवरण मांगे गए हैं। जल्द ही मशीन दुरुस्त कराई जाएगी। इसके बाद जांच सेवा बहाल कराई जाएगी।
-डॉ. दिनेश सिंह मर्तोलिया, प्राचार्य, मेडिकल काॅलेज